सैन्य अधिकारी की पत्नी के अंगदान ने बचाया हृदय रोग से जूझ रहे युवक का जीवन
सैन्य अधिकारी की पत्नी के अंगदान ने बचाया हृदय रोग से जूझ रहे युवक का जीवन
नयी दिल्ली, तीन मई (भाषा) हरियाणा के पंचकूला में चंडीमंदिर स्थित कमांड अस्पताल में ‘ब्रेन डेड’ घोषित किए जाने के बाद भारतीय सेना के एक अधिकारी की पत्नी के अंगों को उनके परिजनों ने दान करने का फैसला किया, जिससे हृदय के ठीक से काम नहीं करने की बीमारी से पीड़ित 14 वर्षीय लड़के को नया जीवन मिल गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
महिला (41) को मस्तिष्काघात हुआ था जिसके बाद उसके पति और दो छोटी बेटियों ने उसके अंगों को दान करने का फैसला लिया ताकि किसी को नया जीवन दिया जा सके।
अस्पताल ने एक बयान में कहा कि दो मई को मरीज को ‘ब्रेन डेड’ घोषित किए जाने के बाद उसका हृदय यहां के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल को दिया गया। इसने कहा कि अस्पताल की एक विशेष टीम ने तत्काल अंग को लाने के लिए चार्टर्ड प्राइवेट जेट से चंडीगढ़ के लिए उड़ान भरी।
बयान में कहा गया कि अंग को निर्धारित समयसीमा के भीतर दिल्ली लाया गया और 14 वर्षीय लड़के के शरीर में सफलतापूर्वक प्रतिरोपित किया गया, जिससे उसे नया जीवन मिला। मरीज की हालत फिलहाल स्थिर है और वह आईसीयू में गहन निगरानी में है।
बयान में कहा गया कि दिल्ली में यातायात पुलिस ने हवाई अड्डे से अस्पताल तक एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे अंग को लगभग 20 मिनट में अस्पताल पहुंचाया जा सका।
इसमें कहा गया, ‘‘कमांड अस्पताल के कर्नल अनुराग गर्ग की विशेष रूप से सराहना की गई क्योंकि उनके असाधारण नेतृत्व और समन्वय ने दान एवं प्रतिरोपण प्रक्रिया की सफलता सुनिश्चित की।’’
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में ‘कार्डियोथोरेसिक सर्जरी’ (हृदय और फेफड़ा प्रतिरोपण) के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मुकेश गोयल ने बताया कि किशोर पिछले एक साल से अधिक समय से अंतिम चरण के हृदय के ठीक से काम नहीं करने की बीमारी से पीड़ित था। उन्होंने कहा कि उसकी बिगड़ती हालत को स्थिर करने के लिए उसे लगभग हर महीने अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता था।
उन्होंने कहा, ‘‘उसकी जान बचाने के लिए हृदय प्रतिरोपण ही एकमात्र विकल्प था।’’
गोयल ने बताया कि महिला को मस्तिष्काघात हुआ और उसे ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया था।
गोयल ने कहा, ‘‘परिजनों ने उसके अंगों को दान करने का फैसला लिया, जिससे कई लोगों की जान बच गई।’’
भाषा
शुभम नेत्रपाल
नेत्रपाल

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