मेरी सफलता की आवाज थीं आशा जी : जीनत अमान

मेरी सफलता की आवाज थीं आशा जी : जीनत अमान

मेरी सफलता की आवाज थीं आशा जी : जीनत अमान
Modified Date: April 14, 2026 / 06:39 pm IST
Published Date: April 14, 2026 6:39 pm IST

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान ने आशा भोसले के गानों को अपनी सफलता का आधार बताते हुए कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात थी कि आशा जी ने उनके करियर के कई हिट गाने गाए।

आशा भोसले का रविवार सुबह 92 वर्ष की आयु में ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।

आशा भोसले ने जीनत अमान पर फिल्माए गए कई लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज दी थी, जिनमें 1971 की फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का “दम मारो दम”, 1979 की ‘द ग्रेट गैम्बलर’ का “दो लफ़्ज़ों की है दिल की कहानी” और 1973 की ‘यादों की बारात’ का “मेरी सोनी, मेरी तमन्ना” शामिल हैं।

जीनत अमान ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा कर आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी। अभिनेत्री ने कहा कि “चुरा लिया है तुमने” और “दम मारो दम” जैसे गीतों से आशा भोसले की आवाज ने कई पीढ़ियों को मोहित किया।

जीनत अमान ने अपने पोस्ट में लिखा, “आज मैं एक महान प्रतिभा के खोने का शोक मना रही हूं। आशा जी की आवाज ने कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया, और यह मेरा सौभाग्य था कि उन्होंने मेरे लिए इतने गीत गाए। ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया’, ‘दो लफ़्ज़ों की’, ‘मेरी सोनी, मेरी तमन्ना’, ‘खतूबा’… यह सूची लंबी है। कहा जा सकता है कि आशा जी ने मेरी सफलता की धुन मुझे उपहार में दी। मैंने कितने घंटे उनकी आवाज़ सुनते हुए बिताए हैं और उनके गीतों पर लिप-सिंक करने से मुझे कितना प्यार मिला है।”

अभिनेत्री ने आशा भोसले की अपने काम के प्रति समर्पण की भी सराहना की और एक घटना का जिक्र किया, जब दोनों को कोलकाता में एक कार्यक्रम में शामिल होना था।

उन्होंने बताया कि आशा भोसले एक दिन पहले दुर्घटना का शिकार हो गई थीं, जिसके कारण उनके शरीर पर चोट के निशान थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मंच पर प्रस्तुति दी।

अमान ने कहा, “जब आशा जी कार्यक्रम में पहुंचीं तो मैं उनके शरीर पर चोट के निशान देखकर हैरान रह गई। लेकिन उन्होंने अपने पेशेवर दायित्व को निभाने का संकल्प लिया और मंच पर शानदार प्रस्तुति दी। उस समय वे 80 वर्ष से अधिक उम्र की थीं, फिर भी उन्होंने कई घंटों तक दर्शकों को बांधे रखा। मैं उस कार्यक्रम से बेहद प्रभावित और प्रेरित होकर लौटी। आशा जी, आपका धन्यवाद। आपकी आवाज की चमक कभी फीकी नहीं पड़ेगी।”

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

नरेश


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