गुवाहाटी, 29 जुलाई (भाषा) असम विधानसभा ने बुधवार को एक विधेयक पारित किया जिसके तहत ‘‘मूल निवासियों’’ और कुछ खास समूहों के लोगों को 250 साल या उससे ज्यादा पुराने ‘मशहूर विरासत संस्थानों’ के पांच किलोमीटर के संरक्षित दायरे में जमीन खरीदने या रखने की इजाजत दी गई है।
असम भूमि और राजस्व विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित करने पर हुई चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने दावा किया कि यह राज्य में बनाया गया ‘‘सबसे धर्मनिरपेक्ष’’ कानून है।
शर्मा ने कहा, ‘‘इस कानून के तहत 250 साल पुराने किसी भी धार्मिक संस्थान को सुरक्षा दी गई है। अब, जो परिवार वर्ष 2006 तक तीन पीढ़ियों से वहां रह रहे हैं, उन्हें वहां रहने की अनुमति होगी, भले ही उनके पास जमीन का पट्टा न हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वहां रहने वाले अन्य लोगों को हटा दिया जाएगा अगर वे बिना अनुमति के रह रहे हैं। इसके अलावा, हिंदू, मुस्लिम या किसी अन्य समूह का कोई भी व्यक्ति उस संरक्षित क्षेत्र में जमीन नहीं खरीद पाएगा।’’
विधेयक में कहा गया है कि जिन लोगों के पास संरक्षित क्षेत्रों में पहले से ही जमीन के पट्टे हैं, उन्हें – चाहे उनका धर्म या सामाजिक वर्ग कुछ भी हो – वहां रहने की अनुमति होगी।
हालांकि, संरक्षित क्षेत्रों में किसी नए व्यक्ति को जमीन खरीदने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि वह मूल निवासियों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, स्थानीय जातीय समुदायों और वंचित समूहों की श्रेणी में न आता हो।
विधेयक के अनुसार, ‘मूल निवासी’ का मतलब है ऐसा व्यक्ति जो एक जनवरी 2006 तक पिछले तीन पीढ़ियों से अपने परिवार के साथ उस संरक्षित इलाके में रह रहा हो, और एक पीढ़ी को 25 साल माना गया है।
भाषा शफीक नरेश
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