असम के मुख्यमंत्री ने जिला आयुक्तों को औपनिवेशिक मानसिकता छोड़ने का निर्देश दिया

असम के मुख्यमंत्री ने जिला आयुक्तों को औपनिवेशिक मानसिकता छोड़ने का निर्देश दिया

असम के मुख्यमंत्री ने जिला आयुक्तों को औपनिवेशिक मानसिकता छोड़ने का निर्देश दिया
Modified Date: September 15, 2026 / 02:34 pm IST
Published Date: September 15, 2026 2:34 pm IST

गुवाहाटी, 15 सितंबर (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने जिला आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे औपनिवेशिक प्रशासनिक मानसिकता का परित्याग करें तथा जन-सेवा में अनुशासन एवं कार्यकुशलता लाएं।

उन्होंने जिला आयुक्तों के दो-दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चूंकि प्रौद्योगिकी और कत्रिम मेधा (एआई) रोजमर्रा के कामकाज का अहम हिस्सा बन गए हैं, इसलिए अधिकारियों को प्रशासन के कामकाज में निजी क्षेत्र जैसा पेशेवर अंदाज लाना चाहिए।

यह सम्मेलन सोमवार आधी रात के बाद संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आधी रात के कुछ ही समय बाद, हमने जोरहाट में जिला आयुक्तों के दो दिवसीय सम्मेलन का समापन किया। इसमें मंत्रियों, उपायुक्तों तथा 15 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 27 घंटे से अधिक समय तक गहन विचार-विमर्श किया गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा संदेश साफ था: हमारे जिला आयुक्तों को औपनिवेशिक प्रशासनिक मानसिकता से बाहर निकलना होगा तथा जन-सेवा में निजी क्षेत्र जैसा अनुशासन, कार्यकुशलता और पेशेवर अंदाज लाना होगा। रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासन में प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम मेधा को अहम भूमिका निभानी होगी।’’

उन्होंने निर्देश दिया कि हर जिला आयुक्त विभागों के साथ बैठक करे ताकि यह पक्का किया जा सके कि हर निर्देश बिना किसी देरी के क्षेत्र स्तर के अधिकारियों तक पहुंचे और उस पर अमल हो।

शर्मा ने कहा, ‘‘असम के जिलों को बेहतर प्रदर्शन के लिए आपस में प्रतस्पर्धा करनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि हर जिला आयुक्त अपने जिले को देश का सबसे अच्छा जिला बनाने की दिशा में काम करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि प्रशासन के रोजमर्रा के कामकाज को सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों के साथ तालमेल बिठाकर चलना चाहिए।

शर्मा ने कहा, ‘‘इन चर्चाओं के साथ-साथ, मैंने 85 से ज़्यादा फाइलें मंजूर कीं तथा गणमान्य लोगों को 34 से ज़्यादा नोट एवं पत्र भी लिखे।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन चर्चाओं से ज़मीनी स्तर पर ठोस बदलाव देखने को मिलेंगे और ‘‘यही वह संकल्प है जिसके साथ हम जोरहाट से जा रहे हैं।’’

भाषा

राजकुमार वैभव

वैभव


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