न्यायालय का पुलिस अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने संबंधी सूरी की याचिका पर विचार करने से इनकार

न्यायालय का पुलिस अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने संबंधी सूरी की याचिका पर विचार करने से इनकार

न्यायालय का पुलिस अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने संबंधी सूरी की याचिका पर विचार करने से इनकार
Modified Date: September 15, 2026 / 02:29 pm IST
Published Date: September 15, 2026 2:29 pm IST

नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली दिल्ली के पूर्व महापौर फरहाद सूरी की याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इनकार कर दिया।

याचिका में सूरी ने एक आपराधिक मामले के सिलसिले में एक पत्रकार की तलाश में दिल्ली स्थित अपने आवास पर ‘‘अवैध’’ छापेमारी का आरोप लगाया था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सूरी को सीधे शीर्ष अदालत का रुख करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 का सहारा लेने के बजाय प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क करने का निर्देश दिया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध याचिकाकर्ता द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत संबंधित थाने का रुख करने पर उचित तरीके से निपटाया जा सकता है। हमें इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि सक्षम पुलिस कानून के मुताबिक सख्ती से कार्रवाई नहीं करेगी।’’

सूरी ने आरोप लगाया था कि 22 और 23 अगस्त की मध्यरात्रि को गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों का एक बड़ा दल सड़क पर वाहन चलाने को लेकर हुए विवाद के एक मामले में आरोपी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश में बिना वारंट के दिल्ली स्थित उनके आवास में दाखिल हुआ था।

सूरी की ओर से पेश अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी ने पक्ष रखा।

पीठ ने अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली सूरी की अन्य याचिका पर भी विचार करने से इनकार कर दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सूरी बीएनएसएस के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल किए बिना प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे शीर्ष अदालत का रुख नहीं कर सकते।

सरकार के विधि अधिकारी ने पुलिस की छापेमारी को अवैध बताए जाने का भी विरोध किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे थे। सामान्य डायरी (जीडी) में इसकी उचित प्रविष्टि मौजूद थी। पुलिस अधिकारियों ने केवल यह पता लगाने के लिए उस व्यक्ति के घर की घंटी बजाई कि क्या वह (उपाध्याय) वहां मौजूद था। जब उन्होंने (सूरी) मना किया तो हम वहां से चले आए। हम उनके घर में दाखिल भी नहीं हुए।’’

सूरी के वकील ने राज्य सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों के बड़े दल करीब 15 पुलिस वाहनों में याचिकाकर्ता के आवास पर पहुंचे थे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि सामान्य डायरी में प्रविष्टि कथित छापेमारी के बाद दर्ज की गई थी। उपाध्याय सड़क पर वाहन चलाने को लेकर हुए एक कथित विवाद के संबंध में गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी का सामना कर रहे हैं।

भाषा खारी वैभव

वैभव


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