असम: काजीरंगा के ईएसजेड को कम करने के प्रस्ताव के खिलाफ कांग्रेस का राज्यभर में प्रदर्शन

असम: काजीरंगा के ईएसजेड को कम करने के प्रस्ताव के खिलाफ कांग्रेस का राज्यभर में प्रदर्शन

असम: काजीरंगा के ईएसजेड को कम करने के प्रस्ताव के खिलाफ कांग्रेस का राज्यभर में प्रदर्शन
Modified Date: August 29, 2026 / 07:54 pm IST
Published Date: August 29, 2026 7:54 pm IST

गुवाहाटी, 29 अगस्त (भाषा) कांग्रेस की असम इकाई ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) को कम करने के प्रस्ताव के विरोध में शनिवार को राज्यभर में ‘पदयात्राएं’ निकालीं।

सोनितपुर, लखीमपुर, हैलाकांडी, करीमगंज, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट समेत कई जिलों में कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने जिला मुख्यालयों की सड़कों पर मार्च किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ईएसजेड को कम करने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की।

गुवाहाटी में राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजिद अली चौधरी, पूर्व सांसद रिपुन बोरा, कांग्रेस की महिला इकाई की अध्यक्ष मीरा बोर्थाकुर और पार्टी के अन्य नेताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

पुलिस ने दिसपुर इलाके में कांग्रेस कार्यालय से प्रदर्शनकारियों को बाहर निकलने से रोक दिया, जिसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने अवरोधक तोड़कर सड़कों पर मार्च करने की कोशिश की।

चौधरी ने कहा कि सरकार के फैसला वापस लेने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम भाजपा नीत सरकार को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को नुकसान नहीं पहुंचाने देंगे, जो हमारा गौरव है। जब तक यह फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।’’

बोरा और बोर्थाकुर ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को पूरे राज्य में उठाएगी तथा लोगों के बीच जागरूकता फैलाएगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पर आरोप लगाया कि वह बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय उद्यान के हितों से समझौता कर रहे हैं।

काजीरंगा के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) को लेकर असम सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है, जिसको लेकर विवाद है।

प्रस्ताव में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के आसपास के बफर जोन को तय 10 किलोमीटर से घटाकर एक-तीन किलोमीटर करने की बात कही गई है।

ईएसजेड में व्यावसायिक गतिविधियों पर गतिविधि की प्रकृति के आधार पर या तो पूरी तरह रोक होती है, या उन्हें नियंत्रित किया जाता है या फिर तय नियमों के तहत अनुमति दी जाती है।

विपक्षी दलों एवं कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में प्रस्तावित कमी से काजीरंगा और उससे लगे कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों के आसपास व्यावसायिक खनन एवं पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।

कार्बी आंगलोंग पहाड़ियां हाथियों के आवागमन का गलियारा भी हैं।

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप


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