इच्छामृत्यु की अनुमति का अनुरोध करने वाली गुर्दा रोगियों को दो लाख रुपये सहायता देने का आश्वासन
इच्छामृत्यु की अनुमति का अनुरोध करने वाली गुर्दा रोगियों को दो लाख रुपये सहायता देने का आश्वासन
कोटा, 16 जुलाई (भाषा) कोटा जिला प्रशासन ने इच्छामृत्यु की अनुमति मांगने के लिए पांच महिलाओं की ओर से राष्ट्रपति को पत्र लिखे जाने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को उनके परिजनों से मुलाकात कर दानदाताओं से जुटाकर दो लाख रुपये की सहायता देने तथा प्राथमिकता के आधार पर गुर्दा प्रतिरोपण कराने का आश्वासन दिया।
इन पांच महिलाओं को न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) में ‘सी-सेक्शन’ (ऑपरेशन के जरिये प्रसव) के बाद गुर्दे से जुड़ी समस्या हो गई थी, जिसके कारण उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है।
बुधवार को उनके परिजनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर गुर्दा प्रतिरोपण कराने या इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की थी।
बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन ने मरीजों के परिजन के साथ बैठक की, ताकि उनके और अस्पताल के बीच जारी विवाद को सुलझाया जा सके। प्रशासन ने मौखिक रूप से प्रत्येक महिला को चिकित्सा खर्च के लिए दो लाख रुपये की सहायता देने का आश्वासन दिया। 25 वर्षीय पिंकी, 37 वर्षीय सुशीला बाई, 27 वर्षीय आरती, 32 वर्षीय धन्नी बाई और 29 वर्षीय रागिनी मीणा ने बुधवार को राष्ट्रपति को पत्र भेजने से पहले डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया था।
एनएमसीएच के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती इन पांचों महिलाओं का मई में सी-सेक्शन के बाद गुर्दे में संक्रमण होने के कारण लगभग 70 दिन से डायलिसिस किया जा रहा है।
कोटा के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट विनोद कुमार मल्होत्रा, एनएमसीएच के प्राचार्य डॉ. निलेश कुमार जैन और नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विकास खंडेलवाल ने मरीजों के रिश्तेदारों से बातचीत की और उनकी मांगों पर सहमति जताई। इन मांगों में मुफ्त और प्राथमिकता के आधार पर डायलिसिस, प्राथमिकता के आधार पर गुर्दा प्रतिरोपण और प्रतिरोपण के बाद इलाज के लिए सरकारी संस्थान चुनने की सुविधा शामिल है।
परिजन को दिए गए प्रस्ताव के अनुसार, यदि परिवार खुद कानूनी रूप से गुर्दा दाता की व्यवस्था करते हैं, तो प्रतिरोपण सर्जरी मुफ्त में की जाएगी।
मल्होत्रा ने पत्रकारों को बताया कि मरीजों को लिखित आश्वासन दिया गया है।
चिकित्सा नियमों के अनुसार, प्रतिरोपण से पहले 90 दिन की अनिवार्य निगरानी अवधि जरूरी होती है।
रागिनी मीणा नामक मरीज ने पत्रकारों से कहा कि दो लाख रुपये की सहायता बहुत कम है, क्योंकि वे डायलिसिस पर पहले ही इससे कहीं ज्यादा खर्च पैसे कर चुके हैं और उन्हें अपनी संपत्तियां बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
रागिनी के भाई विकास मीणा ने कहा कि अधिकारियों ने मरीजों के गुर्दा प्रतिरोपण को प्राथमिकता के आधार पर कराने और डायलिसिस के लिए विशेष मेडिकल कॉलेज पास जारी करने की व्यवस्था करने पर सहमति जताई है।
भाषा जोहेब माधव
माधव

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