पेरियार नदी के संरक्षण को उचित महत्व नहीं दे रहे अधिकारी : केरल उच्च न्यायालय
पेरियार नदी के संरक्षण को उचित महत्व नहीं दे रहे अधिकारी : केरल उच्च न्यायालय
कोच्चि, 17 जुलाई (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने पेरियार नदी में प्रदूषण रोकने के लिए अवजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित करने की प्रस्तावित समय-सीमा पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) सहित संबंधित प्राधिकारों ने नदी के संरक्षण की आवश्यकता को उचित महत्व नहीं दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी. एम. की पीठ ने यह टिप्पणी उस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद की, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा था कि एसटीपी स्थापित करने का कार्य अगले वर्ष अगस्त तक पूरा हो जाएगा।
पीठ ने कहा, ‘‘प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किए जाने वाले कार्यों की प्रगति से हम बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। मुख्य पर्यावरण अभियंता द्वारा 14 जुलाई, 2026 की रिपोर्ट में सुझाई गई समय-सीमा इस अदालत को स्वीकार्य नहीं है। हमारा मत है कि संबंधित प्राधिकारों ने इस अदालत के पूर्व आदेशों तथा पेरियार नदी एवं उससे जुड़े वनस्पति और जीव-जंतुओं के संरक्षण की आवश्यकता को उचित महत्व नहीं दिया है।’’
अदालत ने निर्देश दिया कि एसटीपी की स्थापना से संबंधित समस्त कार्य इस वर्ष 31 दिसंबर तक हर हाल में पूरा किया जाए।
पीठ ने कहा, ‘‘यह निर्देश अनिवार्य है।’’ साथ ही उसने मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित करते हुए मुख्य पर्यावरण अभियंता को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत की ये टिप्पणियां और निर्देश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आयीं, जिनमें उद्योगों और अलुवा मार्केट से निकलने वाले अपशिष्ट को पेरियार नदी में प्रवाहित किए जाने पर रोक लगाकर नदी के प्रदूषण पर अंकुश लगाने का अनुरोध किया गया है।
भाषा गोला वैभव
वैभव

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