न्यायालय सोमनाथ भारती की चुनाव याचिका पर सुनवाई को सहमत हुआ

न्यायालय सोमनाथ भारती की चुनाव याचिका पर सुनवाई को सहमत हुआ

न्यायालय सोमनाथ भारती की चुनाव याचिका पर सुनवाई को सहमत हुआ
Modified Date: July 17, 2026 / 12:47 pm IST
Published Date: July 17, 2026 12:47 pm IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह आम आदमी पार्टी (आप) नेता सोमनाथ भारती की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में मालवीय नगर निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार सतीश उपाध्याय के निर्वाचन को चुनौती दी गई है।

उपाध्याय ने पिछले साल फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारती को 2,131 मतों के अंतर से हराया था।

भारती ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 17 जनवरी को उनकी याचिका खारिज किये जाने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

उच्चतम न्यायालय में भारती की याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने संज्ञान लिया। पीठ ने कहा, ‘‘हम अपील विचारार्थ स्वीकार करते हैं और मामले की सुनवाई करेंगे।’’

भारती ने उच्च न्यायालय में दाखिल चुनावी याचिका में उपाध्याय पर ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ के तहत भ्रष्ट तौर-तरीके अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उपाध्याय ने लोगों को कार से पोलिंग बूथ तक लाने के लिए अपने एजेंट तैनात किए थे।

भारती ने यह भी आरोप लगाया कि उस निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार जितेंद्र कुमार कोचर का पूरा चुनाव अभियान विशेष तौर पर उनके खिलाफ केंद्रित था।

आप नेता ने आरोप लगाया था कि उपाध्याय ने जान-बूझकर और सुनियोजित तरीके से फर्जी मुकाबला का स्वांग रचा, जिसका उद्देश्य धर्मनिरपेक्ष मतदाताओं को भ्रमित और विभाजित करना तथा चुनाव में अनुचित लाभ प्राप्त करना था।

उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी, ‘‘याचिकाकर्ता (भारती) का कोचर को पक्षकार न बनाना कोई मामूली तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक ऐसी कमी है जिसे सुधारा नहीं जा सकता। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों और उच्चतम न्यायालय की व्याख्या के मुताबिक, यह मौजूदा चुनाव याचिका के स्वीकार्य होने की बुनियाद पर ही चोट करता है।’’

उच्च न्यायालय ने भारती की याचिका खारिज करते हुए कहा कि कोचर को प्रतिवादी न बनाना चुनाव याचिका खारिज किए जाने के लिए उचित आधार है।

अदालत ने कहा था कि चुनावी याचिका कोई आम मुकदमा नहीं, बल्कि एक विशेष कार्यवाही है, जिसके नतीजे सीधे तौर पर जनादेश को प्रभावित करते हैं।

भाषा धीरज वैभव

वैभव


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