प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन को दिखाई हरी झंडी
Modified Date: July 17, 2026 / 12:24 pm IST
Published Date: July 17, 2026 12:24 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

जींद (हरियाणा), 17 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें परिचालन में हैं। यह रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन दो घंटे में तय करेगी। इस दौरान यह 12 स्टेशनों पर रुकेगी।

जींद रेलवे स्टेशन पर आयोजित उद्घाटन समारोह में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री ने जींद रेलवे स्टेशन से ट्रेन को रवाना करते समय हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इस ट्रेन में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी सवार थे।

यह ट्रेन पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और एकीकृत की गई है। इसका निर्माण स्वदेशी तकनीक से किया गया है, जो उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

आसमानी नीले और सफेद रंग की आकर्षक डिजाइन वाली यह ट्रेन ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ प्रौद्योगिकी से संचालित होती है। इस तकनीक में हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित किया जाता है, जिससे ट्रेन को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया में अवशेष के तौर पर सिर्फ जल-वाष्प निकलती है, जिसके दौरान कार्बन का उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होता है।

डीजल ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन चालित ट्रेनों से गैसों का उत्सर्जन नहीं होता, ये जीवाश्म ईंधन और उसके आयात पर निर्भरता घटाती हैं तथा काफी कम शोर के साथ संचालित होती हैं।

बिजली से चलने वाली पारंपरिक ट्रेनों के विपरीत, इस ट्रेन के संचालन के लिए पूरी रेल लाइन पर ओवरहेड विद्युतीकरण अवसंरचना की आवश्यकता नहीं होती। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल के माध्यम से ट्रेन के भीतर ही बिजली का उत्पादन किया जाता है, जिससे यह स्वच्छ और अधिक दक्ष परिवहन विकल्प बन जाती है।

हरित हाइड्रोजन के उपयोग से जीवाश्म ईंधन आधारित ताप विद्युत संयंत्रों से उत्पादित बिजली पर निर्भरता भी घटती है, जिससे भारत के टिकाऊ परिवहन की दिशा में परिवर्तन को बल मिलता है।

भारत की इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 डिब्बे हैं, जिससे यह अब तक विकसित सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में शामिल हो गई है।

इसका 3,200 हॉर्सपावर (एचपी) की क्षमता वाला प्रणोदन तंत्र इसे दुनिया में वर्तमान में परिचालन में मौजूद सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में से एक बनाता है।

भाषा गोला प्रशांत

प्रशांत


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