लद्दाख के सभी सात जिलों के लिए स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद गठित की जाएंगी : मुख्य सचिव

लद्दाख के सभी सात जिलों के लिए स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद गठित की जाएंगी : मुख्य सचिव

लद्दाख के सभी सात जिलों के लिए स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद गठित की जाएंगी : मुख्य सचिव
Modified Date: July 13, 2026 / 08:55 pm IST
Published Date: July 13, 2026 8:55 pm IST

लेह, 13 जुलाई (भाषा) लद्दाख में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने सोमवार को सभी सात जिलों में एक-एक स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एएचडीसी) बनाने की घोषणा की।

केंद्र शासित प्रशासन ने इसके साथ ही, लेह और कारगिल से परे जाकर स्थानीय स्तर पर चुने गए स्व-शासन के मौजूदा ढांचे का विस्तार किया है।

लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 371 के विशेष रूप से तैयार ढांचे के तहत बनने वाली प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय संस्था सात जिला पर्वतीय परिषदों से ऊपर होगी। उन्होंने बताया कि यह संस्था विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल करेगी और यह लद्दाख के लिए खास तौर पर बनाया गया अपनी तरह का पहला शासन मॉडल होगा।

अप्रैल 2026 में शाम, नुब्रा, चांगथांग, जंस्कार और द्रास को नए जिलों के तौर पर अधिसूचित करने के साथ ही लद्दाख में जिलों की संख्या दो (लेह और कारगिल) से बढ़कर सात हो गई।

मुख्य सचिव ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘लद्दाख प्रशासन ने सभी सात जिलों में एक-एक स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद गठित करने का फैसला किया है। यह लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर शासन-व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम है।’’

कुंद्रा ने इसके कानूनी ढांचे के बारे में बताया कि लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी) अधिनियम की धारा 3(1) में पहले से ही आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के जरिए हर जिले में एक परिषद के गठन का प्रावधान है।

कुंद्रा ने कहा कि नयी परिषद गठित करने से पहले अधिनियम में केवल आवश्यक संशोधन, जब भी आवश्यक हो और निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन शेष रह जाता है।

उन्होंने कहा कि सातों परिषदों के पास एलएएचडीसी अधिनियम में उल्लेखित सभी शक्तियां होंगी।

मुख्य सचिव ने कहा, ‘‘नए जिलों को वही अधिकार मिलेंगे जो लेह को 1995 से और कारगिल को 2003 से मिले हुए हैं; ये अधिकार कम नहीं होंगे।’’

कुंद्रा ने कहा कि जिले में जमीन के मालिकाना हक और भूमि आवंटन का अधिकार पर्वतीय परिषद के पास है। उन्होंने कहा कि शाम, नुब्रा, चांगथांग, जंस्कार और द्रास अपनी-अपनी सीमाओं के भीतर इस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि परिषद जिला कैडर के पदों के लिए भर्ती और पदोन्नति को विनियमित करेंगी और नए जिलों में नौकरी से जुड़े फैसले जिले के भीतर ही एक चुनी हुई संस्था लेगी।

कुंद्रा ने कहा कि हर एएचडीसी का अपना परिषद कोष होगा और उसे कानून के मुताबिक कर, शुल्क और दूसरे उपकर लगाने का अधिकार होगा, जिससे हर जिले को आय का एक स्वतंत्र स्रोत मिलेगा।

उन्होंने कहा कि परिषद अपनी विकास योजनाएं स्वयं तैयार करेंगी, जिससे हर जिला लेह या कारगिल में लिए गए फैसलों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकेगा।

कुंद्रा ने कहा कि ये परिषद जिला स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, स्थानीय बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों जैसे अहम क्षेत्रों की देखरेख करेंगी, जिससे विकेंद्रीकृत शासन और सेवा वितरण मजबूत होगा।

उन्होंने विशेष तौर पर संविधान में शामिल अनुच्छेद 371 ढांचे के तहत सात परिषदों के ऊपर एक केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय संस्था बनाने के प्रशासन के प्रस्ताव की रूपरेखा भी बताई।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित केंद्र-शासित प्रदेश-स्तरीय निकाय का ढांचा और शक्तियां लद्दाख के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के जरिए तय की जाएंगी।

मुख्य सचिव ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत, पर्वतीय परिषद और नयी संस्था के बीच कुछ अधिकार पुनर्वितरित किये जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि सातों जिलों में से हर एक में एएचडीसी बनाने का फ़ैसला, प्रस्तावित शासन ढांचे की दिशा में पहला ठोस कदम है।

कुंद्रा ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं पर्वतीय परिषदों के साथ-साथ काम करती रहेंगी, जिससे गांव, जिले और केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर चुने हुए प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

भाषा धीरज वैभव

वैभव


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