बाबूलाल मरांडी राज्यपाल से मिले, ‘शराब घोटाले’ में आरोपपत्र दायर करने का निर्देश देने की मांग की
बाबूलाल मरांडी राज्यपाल से मिले, ‘शराब घोटाले’ में आरोपपत्र दायर करने का निर्देश देने की मांग की
(तस्वीर के साथ)
रांची, 31 मार्च (भाषा) झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को “लगभग 750 करोड़ रुपये के” कथित शराब घोटाले के सिलसिले में आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की।
मरांडी ने एसीबी पर आरोपियों को बचाने के लिए जानबूझकर आरोपपत्र दाखिल न करने का आरोप लगाया। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वह मामले की तफ्तीश में एसीबी की भूमिका की समीक्षा करने की पहल करें और जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दें।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मरांडी ने गंगवार को सौंपे पत्र में कहा, “इस मामले में गिरफ्तार किए गए कुल 17 आरोपियों में से 14 को समय पर आरोपपत्र दाखिल न किए जाने के कारण पहले ही जमानत मिल चुकी है। एसीबी ने जानबूझकर उनके खिलाफ 90 दिनों की निर्धारित वैधानिक समय सीमा के भीतर अदालत में आरोपपत्र दाखिल नहीं किया।”
उन्होंने दावा किया कि आठ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एसीबी ने इस मामले में एक भी आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है।
एसीबी ने कथित आबकारी घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में 20 मई 2025 को तत्कालीन आबकारी सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त आबकारी आयुक्त गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया था।
मरांडी ने कहा कि सिंह को गिरफ्तारी के 56 दिन बाद 15 जुलाई 2025 को जमानत मिल गई, जबकि चौबे को आरोपपत्र दाखिल न होने के कारण पिछले साल अगस्त में ‘वैधानिक जमानत’ दे दी गई।
भाजपा नेता ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के निलंबित अधिकारी चौबे को आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी सोमवार को वैधानिक जमानत दे दी गई, क्योंकि निर्धारित अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया।
मरांडी ने कहा कि जांच एजेंसी को 29 मार्च तक आरोपपत्र दाखिल करना था।
उन्होंने राज्यपाल को सौंपे पत्र में दावा किया, “2022 में एक सिंडिकेट को लाभ पहुंचाने के लिए झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव किए गए, जिससे राज्य को राजस्व का भारी नुकसान हुआ। इस घोटाले के शुरू में 38 करोड़ रुपये का होने का अनुमान था, लेकिन अब यह राशि बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।”
बाद में मरांडी ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि आरोपियों को बचाने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची गई।
उन्होंने कहा, “मैंने आज राज्यपाल से मुलाकात की और उनसे आग्रह किया कि वह एसीबी को तत्काल आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दें। मैंने उनसे यह भी अनुरोध किया कि वह राज्य के खजाने की इस लूट और आरोपियों को बचाने की साजिश की पूरी जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करें।”
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप

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