नई दिल्ली: अल नीनो के खतरे के बाजवूद भारत में मॉनसून के तीन महीने करीब-करीब ठीक रहे। मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान सामान्य से 14 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन विभाग इसे सामान्य बारिश ही मानता है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को कहा कि सितंबर में पूरे देश में कुल मासिक बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि सितंबर में बारिश दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 91 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है।
एलपीए का मतलब किसी खास क्षेत्र में किसी निर्धारित अवधि, जैसे एक महीने या एक मौसम के दौरान दर्ज बारिश का लंबे समय, आमतौर पर 30 से 50 वर्षों का औसत होता है। वर्ष 1971 से 2020 के बीच के आंकड़ों के आधार पर सितंबर के लिए दीर्घावधि औसत करीब 167.9 मिमी है। आईएमडी ने यह भी कहा कि सितंबर में मासिक औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। वहीं कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति होने का भी अनुमान है।
अल नीनो प्रशांत महासागर के गर्म होने से पैदा होने वाली जलवायु स्थिति है, जो भारत में मॉनसून कमजोर करने की आशंका बढ़ाती है। देश में इसका सबसे ज्यादा महत्व दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के संदर्भ में है। 2023 में अल नीनो के बावजूद पूरे जून-सितंबर मानसून की बारिश सामान्य से केवल 5.3 फीसदी कम रही थी। वहीं इस साल के लिए भी सामान्य स्थिति का अनुमान लगाया था। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के मुताबिक यह पिछले 7 दशकों में सबसे ताकतवर अल नीनो होगा। सितंबर तक सुपर अल नीनो का प्रभाव शुरू होने के बाद इस साल के अंत तक इसका तांडव चरम पर होगा। ऐसे में भारत के लिए चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।