बंगाल: शिक्षण व गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले से संबंधित विधेयक पारित
बंगाल: शिक्षण व गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले से संबंधित विधेयक पारित
कोलकाता, 10 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा ने बृहस्पतिवार को ध्वनिमत से वह संशोधन विधेयक पारित कर दिया जिसके तहत सरकार राज्य के एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के तबादले कर सकेगी।
पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं कॉलेज (प्रशासन और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को राज्य मंत्रिमंडल ने आठ सितंबर को मंजूरी दी थी।
अधिकारियों ने बताया कि इसमें 2017 के मौजूदा कानून की धारा 14ए में एक नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव था, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में तबादला किया जा सके।
यह विधेयक उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान पेश किया।
विधेयक पेश किए जाने के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित कानून के जरिए ‘‘कथित विद्वानों’’ को नए स्थापित संस्थानों में भेजा जाएगा, जिससे इन संस्थानों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक संस्थानों की स्वायत्तता और सरकार के प्रति उनकी जवाबदेही के बीच संतुलन बनाएगा। इससे पीएचडी की निगरानी और शोध परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जो लोग विधेयक के प्रावधानों से असंतुष्ट हैं, वे अपनी नौकरी छोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि मौजूदा कानून में संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी, अधिकारी ने पहले कहा था, ‘‘यह जरूरी है। ऐसी वास्तविक हकीकतें हैं जिसके कारण इस विधेयक की आवश्यकता पड़ी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ कई अनुभवी प्रोफेसरों को नए विश्वविद्यालयों में भेजा जाएगा। वे इन विश्वविद्यालयों को यह तय करने में मार्गदर्शन देंगे कि बुनियादी ढांचा कैसा होना चाहिए, कक्षाएं किस तरह संचालित की जाएं और संस्थानों को उत्कृष्टता के केंद्र में कैसे बदला जाए।’’
मुख्यमंत्री ने कहा था कि इन ‘अनुभवी शिक्षकों’ को झाड़ग्राम और कूचबिहार जैसे स्थानों पर स्थापित नए विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालयों के बीच मानव संसाधनों का आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा।
भाषा शोभना संतोष
संतोष

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