बच्चों के अपहरण के मामलों की समयबद्ध जांच संबंधी याचिका पर केंद्र को उच्चतम न्यायालय का नोटिस
बच्चों के अपहरण के मामलों की समयबद्ध जांच संबंधी याचिका पर केंद्र को उच्चतम न्यायालय का नोटिस
नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बच्चों के अपहरण के मामलों की समयबद्ध जांच, विशेष जांच प्रक्रियाओं और त्वरित सुनवाई के लिए समर्पित अदालतों के गठन सहित एक समान राष्ट्रव्यापी तंत्र बनाने संबंधी एक जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार और राज्यों से जवाब तलब किया है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विधि आयोग को नोटिस जारी किए।
‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ अश्वनी कुमार दुबे के जरिये दायर इस याचिका में बच्चों के अपहरण के मामलों से निपटने में प्रशासनिक एवं ढांचागत तंत्र की विफलताओं का हवाला दिया गया है। याचिका में जांच एजेंसियों द्वारा त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘केंद्र और राज्यों को मानक प्रश्नावली, विशेष जांच प्रक्रिया तैयार करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए कि समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए अपहरण के मामलों की तफ्तीश सहायक पुलिस आयुक्त/थाना प्रभारी स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा न की जाए।’’
याचिका में अपहरण के मामलों को एक साल के भीतर निपटाने के लिए ‘विधायक/सांसद’ अदालतों की तरह ही विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
इसमें कहा गया है, ‘‘केंद्र और राज्यों को अपहरणकर्ता तथा उसके परिवार के सदस्यों की पूरी संपत्ति का आकलन करने और उसी अनुसार धनशोधन, बेनामी संपत्ति और काले धन से जुड़े प्रावधानों को लागू करने का निर्देश दिया जाए।’’
याचिका में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) से जुड़े आंकड़ों और दिल्ली, हैदराबाद, राजस्थान तथा देश के अन्य हिस्सों की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस समस्या के समाधान के लिए एक समान संस्थागत तंत्र की आवश्यकता है।
याचिका में उठाई गई एक मुख्य शिकायत यह भी है कि लापता बच्चों से संबंधित शिकायतों पर प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय इन शिकायतों को केवल ‘‘गुमशुदा’’ या ‘‘लापता व्यक्ति’’ रिपोर्ट के रूप में दर्ज किया जाता है।
याचिका के अनुसार, इस तरह की कार्यशैली से आपराधिक जांच शुरू होने में देरी हो सकती है।
भाषा खारी सुरेश
सुरेश

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