बंगाल: पूर्वी कोलकाता की आर्द्रभूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती पर विचार

बंगाल: पूर्वी कोलकाता की आर्द्रभूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती पर विचार

बंगाल: पूर्वी कोलकाता की आर्द्रभूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती पर विचार
Modified Date: February 23, 2026 / 07:35 pm IST
Published Date: February 23, 2026 7:35 pm IST

कोलकाता, 23 नवंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि में 500 से अधिक अवैध निर्माणों को गिराने के विरुद्ध जन आंदोलनों से निपटने में राज्य सरकार की असमर्थता के मद्देनजर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह इस कार्य को पूरा करने के लिए अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती पर विचार कर रहा है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि अवैध रूप से भरे गए दलदली क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माणों को हटाने के लिए पहले दिए गए उसके निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने अभी तक उन्हें ध्वस्त नहीं किया है।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि के अंतर्गत आने वाले जल निकायों पर अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने में राज्य सरकार के अधिकारियों की लाचारी को देखते हुए कहा, ‘‘अदालत इस कार्य को पूरा करने के लिए अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती पर विचार कर रही है।’’

अदालत ने याचिकाकर्ता को मामले में भारत सरकार को प्रतिवादी के तौर पर पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की।

पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि प्रबंधन प्राधिकरण (ईकेडब्ल्यूएमए) की वेबसाइट के मुताबिक, कोलकाता के पूर्वी छोर पर स्थित और 12,500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि सीवेज में पनपने वाली मछलियों के तालाब के सबसे बड़े समूहों में से एक है।

न्यायमूर्ति सिन्हा ने स्पष्ट रूप से नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों की ओर से अदालत में कई रिपोर्ट पेश किए जाने के बावजूद आर्द्रभूमि के जीर्णोद्धार के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे और कोई रिपोर्ट नहीं चाहिए, मैं जमीनी स्तर पर काम होते देखना चाहती हूं।’’

अदालत ने कोलकाता नगर निगम और दक्षिण 24 परगना जिले के क्षेत्राधिकार वाले उक्त क्षेत्र में 500 से अधिक अवैध निर्माणों का उल्लेख करते हुए पूछा कि इन्हें ध्वस्त करने एवं आर्द्रभूमि को बहाल करने के लिए क्या किया जा रहा है?

जब प्राधिकरण के वकील ने बताया कि इन निर्माणों को अवैध घोषित करते हुए कई आदेश दिये गये हैं, तो अदालत ने कहा कि इन आदेशों को अनधिकृत निर्माणों को ध्वस्त करके लागू किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास भट्टाचार्य ने कहा कि पूर्वी कोलकाता स्थित आर्द्रभूमि में अवैध निर्माण कार्य जारी है, जिससे नाजुक पारिस्थितिक संतुलन खतरे में पड़ रहा है।

उन्होंने पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि प्राधिकरण से अनुरोध किया कि वे अदालत के निर्देशों के अनुसार उठाए गए कदमों की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश


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