बंगाल में स्कूलों में वंदे मातरम् के पूरे अंतरे गाना अनिवार्य, सरकारी मदद रोकने की चेतावनी

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बंगाल में स्कूलों में वंदे मातरम् के पूरे अंतरे गाना अनिवार्य, सरकारी मदद रोकने की चेतावनी

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 07:05 PM IST

कोलकाता, तीन सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को स्कूलों को चेतावनी दी कि यदि प्रार्थना के दौरान वंदे मातरम् का पूरा अंतरा गाना अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया गया, तो वित्तीय सहायता और सरकार की अन्य मदद रोक दी जाएगी।

कोलकाता के गोलपार्क स्थित रामकृष्ण मिशन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन विवेकानंद विद्या भारती विकास परिषद के वार्षिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ‘‘विनाश के कगार पर पहुंचा दिया गया’’।

उन्होंने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार स्कूल शिक्षा में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रवादी मूल्यों को बहाल करने के लिए सुधार कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कुछ लोगों ने वंदे मातरम् के पूरे अंतरे गाने पर आपत्ति जताई थी। मैंने उनसे कहा कि सरकारी सहायता बंद कर दी जाएगी। इसके बाद वे कुछ हद तक पीछे हटे। वे खड़े तो हुए, लेकिन होंठ नहीं हिलाए। तब मैंने उनसे कहा कि होंठ भी हिलने चाहिए।’’

अधिकारी ने दावा किया कि वाम मोर्चा शासन के दौरान अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा को सीमित किया गया, जबकि तृणमूल के शासनकाल में ‘‘तुष्टीकरण की राजनीति के जरिए स्कूल के पाठ्यक्रम को विकृत किया गया’’।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल के पाठ्यक्रम में ‘मां’, ‘जल’ और ‘आकाश’ जैसे शब्दों को जानबूझकर क्रमशः ‘अम्मा’, ‘पानी’ और ‘आसमान’ से बदल दिया गया।

उनके अनुसार, ये ‘‘सूक्ष्म बदलाव’’ ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद जैसे दिग्गजों के शैक्षणिक विचारों के विपरीत थे।

अधिकारी ने पिछली सरकार पर शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) पर प्रतिबंध लगाने का ‘‘अक्षम्य अपराध’’ करने का भी आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं हाल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिला था और उनसे दो अनुरोध किए। पहला, मैंने उनसे राज्य में और अधिक सैनिक स्कूल खोलने का आग्रह किया और दूसरा, मैंने कहा कि मैं स्कूलों और कॉलेजों में एनसीसी को अनिवार्य बनाने की अनुमति मांगते हुए उन्हें पत्र लिखूंगा। मैंने उन्हें वह पत्र पहले ही भेज दिया है और उन्होंने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।’’

अधिकारी की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम में बदलाव, शिक्षकों की भर्ती और शिक्षण संस्थानों में विचारधारा की भूमिका को लेकर जारी राजनीतिक मतभेदों के बीच आई है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब बदलाव और अवसर देने की बात आती है तो पश्चिम बंगाल के लोग समय देते हैं। उन्होंने आजादी के बाद कांग्रेस को समय दिया, उसके बाद संयुक्त मोर्चा और वाम मोर्चा सरकारों को पर्याप्त अवसर दिए और पिछले 15 वर्षों से उन्होंने तृणमूल को समय दिया।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘लेकिन उन्होंने सही समय पर राज्य में बदलाव भी किया, वरना यहां बांग्लादेश की इस्लामी शिक्षा व्यवस्था को दोहराया गया होता।’’

उन्होंने यह टिप्पणी राज्य के राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में की।

उन्होंने दावा किया कि यदि तृणमूल शासन के पिछले दशक में अपनाई गई शिक्षा नीति कुछ और समय तक जारी रहती तो ‘‘हमारे मूल्य, विरासत, परंपरा, देशभक्ति और राष्ट्रवाद हमेशा के लिए खत्म होने के कगार पर पहुंच जाते।’’

पिछली तृणमूल सरकार के दौरान स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर ‘‘बच्चों में विभाजन पैदा करने’’ का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कक्षा पांच से आठ तक की छात्रवृत्ति केवल मुस्लिम छात्रों के लिए उपलब्ध कराई गई, जबकि अन्य समुदायों के छात्रों को इससे वंचित रखा गया।’’

उन्होंने राज्य में शिक्षक भर्ती घोटाले का भी मुद्दा उठाया और कहा कि ‘‘यह तृणमूल कांग्रेस की करतूत थी’’। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार संस्थागत भ्रष्टाचार को खत्म करेगी।

यादवपुर विश्वविद्यालय में दीवारों पर नारे लिखे जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘‘परिसर की दीवारों पर अब भी ‘फ्री फलस्तीन’ और ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारे लिखे जा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की नीति ‘‘राष्ट्रविरोधी गतिविधियों’’ को कतई बर्दाश्त नहीं करने’’ की है।

भाषा राखी नरेश

नरेश