बंगाल चुनाव: समानांतर ‘रणनीति कक्ष’ का संचालन कर रहे हैं ममता-अभिषेक और शाह
बंगाल चुनाव: समानांतर ‘रणनीति कक्ष' का संचालन कर रहे हैं ममता-अभिषेक और शाह
कोलकाता, 23 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा की 152 सीटों पर बृहस्पतिवार को पहले चरण का मतदान हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता अमित शाह ने क्रमश: कालीघाट और साल्ट लेक से अपने अपने दलों के ‘रणनीति कक्ष’ का संचालन किया तथा इस महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले में वास्तविक समय में मतदान और बूथ स्तर की गतिविधियों पर पल- पल नजर रखी।
बनर्जी के साथ उनके भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी थे, जबकि शाह के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता थे।
राज्य में बृहस्पतिवार को विधानसभा चुनाव के पहले चरण में तेजी से मतदान हुआ, जिसमें अपराह्न तीन बजे तक 3.6 करोड़ मतदाताओं में से 78.77 प्रतिशत अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। इस दौरान छिटपुट हिंसा, धमकियों और भाजपा उम्मीदवारों पर हमलों के कुछ मामले भी सामने आए।
सुबह से ही, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक केंद्र कालीघाट एक तरह से कमांड सेंटर बन गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी मतदान के रुझानों, जिले से मिली जानकारी और किसी भी तरह की गड़बड़ी के संकेतों पर कड़ी नजर रख रहे थे।
स्थानीय सूत्रों के व्यापक नेटवर्क से सुसज्जित तृणमूल नेतृत्व न केवल निगरानी कर रहा था, बल्कि जिले के नेताओं को, विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में, निर्देश भी जारी कर रहा था। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि एक बेहद प्रतिस्पर्धी चुनाव में यह “सतर्कता की एक अतिरिक्त कड़ी” की तरह था।
चुनाव प्रचार के दौरान ईवीएम में कथित हेराफेरी को लेकर बनर्जी द्वारा बार-बार सार्वजनिक चेतावनी दिए जाने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई है, जिसमें मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से खराब मशीनों को अस्वीकार करने और चुनावी कदाचार के किसी भी प्रयास के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है।
अगर कालीघाट तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक केंद्र था, तो भाजपा के सॉल्ट लेक कार्यालय में भी एक समानांतर कमान संरचना बनायी गयी थी जहां चुनावी गतिविधियों पर नजर रखने के लिये शाह खुद मौजूद थे।
बंगाल की चुनावी लड़ाई पर केंद्रीय नेतृत्व की मजबूत पकड़ को रेखांकित करते हुए मतदान शुरू होने के कुछ ही समय बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यहां सॉल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में पार्टी के ‘रणनीति कक्ष’ का दौरा किया।
सूत्रों ने बताया कि राज्य में पार्टी के चुनाव प्रचार की बारीकी से निगरानी कर रहे शाह सुबह ‘रणनीति कक्ष’ पहुंचे और जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक की।
यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी आधिकारिक यात्रा का हिस्सा नहीं था और उत्तरी बंगाल के कई निर्वाचन क्षेत्रों और दक्षिणी बंगाल के कुछ हिस्सों में मतदान शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद हुआ था।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने मतदान प्रक्रिया का जायजा लिया, विशेष रूप से उत्तरी बंगाल के उन जिलों में जहां भाजपा अपना गढ़ बरकरार रखना चाहती है।
उन्होंने मतदान प्रतिशत और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की रिपोर्ट के संबंध में पार्टी पदाधिकारियों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की भी समीक्षा की।
इस दौरे से यह संकेत मिलता है कि भाजपा नेतृत्व पहले चरण को कितना महत्व दे रहा है, जिसे व्यापक रूप से दो चरणों वाले चुनाव के शेष हिस्से के लिए माहौल तैयार करने वाला माना जा रहा है।
जहां एक ओर मतदाता मतदान केंद्रों के बाहर भीषण गर्मी और उमस का सामना कर रहे थे, वहीं इन ‘रणनीति कक्ष’ के भीतर की गहमागहमी एक गहरे राजनीतिक द्वंद्व को दर्शाती थी – जो विमर्श पर नियंत्रण, संगठनात्मक शक्ति और त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर था।
तृणमूल के लिए, मुख्य जोर एक विकेंद्रीकृत लेकिन मजबूती से समन्वित जमीनी स्तर के नेटवर्क के माध्यम से अपने गढ़ की रक्षा करने पर था, जिसमें ममता बनर्जी अपनी आजमाई हुई जिला स्तरीय मशीनरी पर भरोसा कर रही थीं।
भाजपा के लिए, यह रणनीति एक केंद्रीकृत, डेटा-संचालित अभियान की छाप लिए हुए थी, जिसमें शाह के सीधे दखल ने चुनावी मैदान को सूक्ष्म रूप से प्रबंधित करने और प्रमुख क्षेत्रों में अधिकतम लाभ प्राप्त करने के पार्टी के प्रयास को उजागर किया।
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश

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