बंगाल : दुर्गा पूजा समितियों में नेतृत्व परिवर्तन के बीच कोलकाता में त्योहार की तैयारियां तेज
बंगाल : दुर्गा पूजा समितियों में नेतृत्व परिवर्तन के बीच कोलकाता में त्योहार की तैयारियां तेज
कोलकाता, दो अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा में अभी ढाई महीने बाकी हैं, लेकिन कोलकाता में तैयारियां तेज हो गई हैं।
इस बीच, पूजा समितियों के नेतृत्व में बदलाव हुआ है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस जुड़े नेताओं की जगह कमान संभाल ली है।
राज्य में सत्ता बदलने के बाद यह पहली दुर्गा पूजा होगी। इस साल अप्रैल में विधानसभा चुनाव में भाजपा तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को समाप्त कर सत्तारूढ़ हुई है। इस साल दुर्गा पूजा उत्सव 16 से 21 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस के पुराने शासनकाल से लंबे समय से जुड़ी कई जानी-मानी पूजा समितियों ने सरकार बदलने के बाद या तो अपने-अपने संगठनों का पुनर्गठन किया है या नए पदाधिकारी नियुक्त किए हैं।
इनमें सबसे प्रमुख श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब और सुरुचि संघ हैं। सुरुचि संघ के पुराने पदाधिकारियों के हटने के बाद भाजपा विधायक सौरव सिकदर ने वहां संगठन से जुड़ी अहम भूमिका संभाली है, जबकि स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की पूजा समिति से जुड़े हैं।
श्रीभूमि पूजा का 2025 तक राज्य के पूर्व मंत्री सुजीत बोस से संबंध था जबकि सुरुचि संघ में दूसरे पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास की अहम भूमिका थी।
हालांकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि वह किसी भी दुर्गा पूजा समिति की अध्यक्षता नहीं करेंगे। उनका कहना है कि त्योहार लोगों की अपनी पहल होनी चाहिए, न कि राजनीतिक प्रभाव जमाने का जरिया। फिर भी, वह कॉलेज स्क्वायर दुर्गा पूजा की ‘खूंटी पूजा’ में शामिल हुए।
मोहम्मद अली पार्क में ‘खूंटी पूजा’ के दौरान राज्य मंत्री और भाजपा नेता तपस रॉय विशेष अतिथियों की सूची में शामिल थे।
‘खूंटी पूजा’ या दुर्गा पूजा की नींव रखने की रस्म आमतौर पर रथ यात्रा के पहले दिन की जाती है, जब भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक अपनी यात्रा शुरू करते हैं।
दक्षिण कोलकाता के पटुली में, भाजपा विधायक सरबरी मुखर्जी को गिरफ्तार पूर्व तृणमूलपार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता की जगह केंदुआ शांति संघ का मुख्य संरक्षक नामित किया गया है। इसी तरह, बारानगर लोलैंड सर्बजनिन ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता प्रदीप नारायण बोस के स्थान पर भाजपा विधायक सजल घोष को नामित किया है।
राजडांगा नबोदय संघ, जो पहले तृणमूल के कद्दावर पार्षद सुशांत घोष (जो अभी न्यायिक हिरासत में हैं) से जुड़ा था, ने इस साल की पूजा सिर्फ क्लब के सदस्यों के साथ मिलकर आयोजित करने का फैसला किया है। इसने प्रतीकात्मक रूप से ‘शोधन’ (सुधार) को अपना ध्येय वाक्य चुना है।
कोलकाता और उसके आस-पास के इलाकों की कई अन्य पूजा समितियों ने भाजपा नेताओं को अपनी आयोजन समितियों में शामिल किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि बंगाली हिंदुओं की भावनाओं से जुड़े इस त्योहार को राजनीतिक बदलाव के बावजूद उसी उत्साह के साथ मनाया जाता रहेगा।
संतोषपुर लेक पल्ली समिति के सोमनाथ दास ने कहा, ‘‘पूजा आयोजन के लिए हमारा बजट करीब एक करोड़ करोड़ रुपये है। जादवपुर के स्थानीय भाजपा विधायक अब हमारे साथ जुड़े हैं। हम न तो जश्न का दायरा कम कर रहे हैं और न ही अपनी परंपराओं से हट रहे हैं।’’
भाषा धीरज राजकुमार
राजकुमार

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