बच्चों की अभिरक्षा सौंपे जाने के मामले में उनका सर्वोत्तम हित, कल्याण सबसे महत्वपूर्ण: न्यायालय

बच्चों की अभिरक्षा सौंपे जाने के मामले में उनका सर्वोत्तम हित, कल्याण सबसे महत्वपूर्ण: न्यायालय

बच्चों की अभिरक्षा सौंपे जाने के मामले में उनका सर्वोत्तम हित, कल्याण सबसे महत्वपूर्ण: न्यायालय
Modified Date: November 29, 2022 / 07:56 pm IST
Published Date: July 14, 2022 10:34 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक बच्चे की अभिरक्षा (कस्टडी) सौंपे जाने के मामले में निर्णय करते समय उसका सर्वोत्तम हित और कल्याण देखा जाना सबसे महत्वपूर्ण है।

न्यायालय ने कहा कि अदालतों को एक ऐसा मार्ग चुनना चाहिए, जो बच्चे का ‘‘स्वस्थ विकास और शिक्षा’ सुनिश्चित करे और जीवन की समस्याओं का सामना एक ‘‘परिपक्व वयस्क’’ के रूप में करने के लिए उसे तैयार करे।

न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने दो नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा उनकी अमेरिका में रहने वाली मां को सौंप दी और तमिलनाडु में रहने वाले उनके पिता को एक सप्ताह में अमेरिकी वीजा के लिए आवेदन करने और इसके एक सप्ताह बाद अलग रह रही पत्नी को बच्चों को सौंपने के लिए वहां की यात्रा करने को कहा।

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने बच्चों की अभिरक्षा संबंधी कानूनों और शीर्ष अदालत की रिट शक्तियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘इस बात पर पूरी तरह एकमत है कि बच्चे के सर्वोत्तम हित और कल्याण सर्वोपरि हैं।

न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘इसलिए हम यह मानेंगे कि मामले में बार-बार जिस बात पर खास तौर पर विचार किया जाना चाहिए, वह बच्चे का कल्याण होना चाहिए।’’

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा, ‘‘बच्चे के कल्याण को इन और अन्य सभी प्रासंगिक कारकों पर विचार करके तय किया जाना चाहिए, जिसमें बच्चे के सामान्य मनोवैज्ञानिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक कल्याण शामिल हैं। अदालतों को एक ऐसा मार्ग चुनना चाहिए, जो बच्चों का ‘‘स्वस्थ विकास और शिक्षा’ सुनिश्चित करे और जीवन की समस्याओं का सामना एक ‘‘परिपक्व वयस्क’’ के रूप में करने के लिए उसे तैयार करे।’’

महिला का पति कथित तौर पर उसकी सहमति के बिना अपने दो बच्चों के साथ भारत वापस आया था। महिला ने यहां शीर्ष अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अधिकारियों को ‘नाबालिग बच्चों का तुरंत पता लगाने और उन्हें पेश करने’ का निर्देश देने और और वहां की एक स्थानीय अदालत द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में उनकी अभिरक्षा उन्हें सौंपने का अनुरोध किया था।

भाषा

देवेंद्र दिलीप

दिलीप


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