‘उड़िया अस्मिता’ की उपेक्षा करने के कारण बीजद 2024 का चुनाव हारी: मांझी

‘उड़िया अस्मिता' की उपेक्षा करने के कारण बीजद 2024 का चुनाव हारी: मांझी

‘उड़िया अस्मिता’ की उपेक्षा करने के कारण बीजद 2024 का चुनाव हारी: मांझी
Modified Date: April 4, 2026 / 12:10 am IST
Published Date: April 4, 2026 12:10 am IST

भुवनेश्वर, तीन अप्रैल (भाषा) ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को कहा कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ‘‘उड़िया अस्मिता’’ एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गई थी क्योंकि पिछली बीजू जनता दल (बीजद) सरकार ने राज्य का प्रशासन गैर-उड़िया नौकरशाहों को सौंप दिया था।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजद को हराया था। मुख्यमंत्री ने गैर-उड़िया अधिकारियों का जिक्र कर तमिल मूल के वी के पांडियन की ओर स्पष्ट रूप से इशारा किया।

माझी ने यहां एक निजी टेलीविजन चैनल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘बहुत से लोग पूछते हैं कि उड़िया अस्मिता चुनावी मुद्दा क्यों बन गई? एक सामान्य उड़िया के रूप में इसकी परिभाषा मेरे लिए स्पष्ट है : मैं उड़िया हूं, मेरी भाषा उड़िया है और ओडिशा मेरी पहचान है।’’

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का नाम लिए बिना कहा, ‘‘अपने नेता के रूप में उड़िया लोग ऐसे व्यक्ति को चाहते हैं, जो उनकी भाषा एवं भावनाओं को समझे और शासन व्यवस्था में उड़ियापन हो। पिछली सरकार में इसकी भारी कमी थी।’’

पांडियन, पटनायक के विश्वस्त सहयोगी थे और वह बीजद में भी शामिल हो गए थे। अधिकारी से नेता बने पांडियन को कभी बीजद अध्यक्ष का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी माना जाता था लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद वह सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जब प्रशासन ओडिशा से बाहर के अधिकारियों को सौंप दिया गया तो उड़िया लोगों का नाराज होना स्वाभाविक था। साल 2024 का चुनावी जनादेश उस व्यापक जन-असंतोष का स्पष्ट प्रतिबिंब था।’’

भाषा

सिम्मी प्रशांत

प्रशांत


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