Naxalite Leader Prashant Bose Death: एक करोड़ के इनामी नक्सली लीडर ‘किशन दा’ की मौत.. 5 साल से माओवादी पत्नी भी है सलाखों के पीछे

Naxalite Leader Prashant Bose Death: एक करोड़ के इनामी नक्सली नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा की रांची में इलाज के दौरान मौत, लंबे समय से थे बीमार।

Naxalite Leader Prashant Bose Death: एक करोड़ के इनामी नक्सली लीडर ‘किशन दा’ की मौत.. 5 साल से माओवादी पत्नी भी है सलाखों के पीछे

Naxalite Leader Prashant Bose Death || Iamge- ANI News File

Modified Date: April 3, 2026 / 09:49 pm IST
Published Date: April 3, 2026 9:31 pm IST
HIGHLIGHTS
  • नक्सली नेता किशन दा का निधन
  • रांची में इलाज के दौरान मौत
  • 1960 से माओवादी आंदोलन से जुड़े थे

रांची: देश में एक तरफ जहां केंद्र और राज्य की सरकारों ने सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान कर दिया है तो वही माओवाद से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक़ जेल में बंद एक शीर्ष नक्सली नेता की इलाज के दौरान मौत हो गई है। (Naxalite Leader Prashant Bose Death) बीमारी और बढ़ती उम्र की समस्या के चलते जान गंवाने वाले नक्सली नेता का नाम प्रशांत बोस है।

कैसे हुई प्रशांत बोस की मौत?

न्यूज एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक़ माओवादियों का शीर्ष नेता प्रशांत बोस उर्फ़ किशन दा झारखण्ड में रांची के केंद्रीय बिरसा मुंडा जेल में बंद था। वह अक्सर बीमार रहता था। जेल प्रशासन की देखरेख में प्रशांत बोस का इलाज जारी था। इस बीच आज माओ नेता बोस ने राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।

आरआईएमएस के अधीक्षक डॉ. हिरेन बिरुआ ने बताया कि, 82 साल के बोस कई बीमारियों से पीड़ित थे और जेल में उनका इलाज चल रहा था। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें आरआईएमएस में स्थानांतरित किया गया, जहां आज सुबह उनका निधन हो गया। (Naxalite Leader Prashant Bose Death) झारखंड पुलिस ने नवंबर 2021 में बोस और उनकी पत्नी शीला मरांडी को गिरफ्तार किया था। वह भी सीपीआई माओवादी की सदस्य हैं।

1960 के दशक में जुड़ा था माओवादी संगठन से

रांची में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इंस्पेक्टर जनरल (ऑपरेशन) अमोल विनुकंत होमकर ने कहा था कि इन दोनों को चार अन्य सक्रिय सदस्यों के साथ 12 नवंबर 2021  को गिरफ्तार किया गया था। आईजी ने कहा था कि बोस उर्फ ​​’किशन दा’ को राज्य के कोल्हान क्षेत्र से पुलिस चेकिंग अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया था, जो एक विशिष्ट सूचना के आधार पर चलाया गया था। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नीरज सिन्हा ने कहा, “वह (किशन दा) बिहार, झारखंड , पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के शीर्ष नक्सली नेताओं में से एक थे। वे 1960 के दशक से नक्सली आंदोलन से जुड़े हुए थे। पुलिस को अभी उनके बारे में पूरी जानकारी जुटानी बाकी है।” आईजी ने बोस की गिरफ्तारी को “सबसे बड़ी उपलब्धि” बताया था।

दे चुका था 200 वारदातों को अंजाम

प्रशांत बोस झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, समेत कई राज्यो में 200 से भी ज्यादा नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है। पुलिस प्रशांत बोस को बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र में नक्सली संगठन के ऑपरेशन का मास्टरमाइंड मानती है। प्रशांत बोस माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया का संस्थापक सदस्य हैं, जिसका सीपीआई (माओवादी) बनाने के लिए पीपुल्स वार ग्रुप में विलय हो गया था। (Naxalite Leader Prashant Bose Death) प्रशांत बोस के खिलाफ झारखंड में करीब 50 मामले दर्ज थे और उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सालो पहले हुई गिरफ्तारी के दौरान प्रशांत बोस के पास से डेढ़ लाख रुपये और एक पेन ड्राइव भी बरामद की गई थी, जिससे पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे थे।

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