वादे के मुताबिक रेल मार्ग नहीं बने तो रेल मंत्री को ओडिशा नहीं आने देंगे: बीजद सांसद

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वादे के मुताबिक रेल मार्ग नहीं बने तो रेल मंत्री को ओडिशा नहीं आने देंगे: बीजद सांसद

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  • Publish Date - February 3, 2026 / 06:27 PM IST,
    Updated On - February 3, 2026 / 06:27 PM IST

नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) ओडिशा के तीन आदिवासी जिलों—जेयपोर, नबरंगपुर और मलकानगिरी—में रेल संपर्क में एक दशक से हो रही देरी का जिक्र करते हुए बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद मुजीबुल्ला खान ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि यदि वादे के मुताबिक, रेल परियोजनाओं का निर्माण नहीं किया गया तो उनकी पार्टी रेल मंत्री को राज्य का दौरा नहीं करने देगी।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान मुद्दा उठाते हुए खान ने कहा कि वर्ष 2016 में राज्य में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजद सरकार थी, तब तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु के साथ दो समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे।

उन्होंने बताया कि पहले एमओयू के तहत ओडिशा सरकार ने 40 किलोमीटर लंबी जेयपोर–नबरंगपुर रेल लाइन के लिए भूमि उपलब्ध कराने और निर्माण लागत का 50 प्रतिशत वहन करने पर सहमति जताई थी। दूसरे एमओयू में जेयपोर और मलकानगिरी के बीच 140 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का प्रावधान था, जिसके तहत राज्य सरकार ने परियोजना लागत का 25 प्रतिशत वहन करने का वादा किया था।

खान ने कहा, “जब हम राज्य में सत्ता में थे, तब भाजपा यह दावा करती थी कि केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार बनने से ये परियोजनाएं पूरी होंगी। ओडिशा में ऐसी सरकार बने दो साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हुआ है।”

खान ने कहा कि ओडिशा का नवरंगपुर और मलकानगिरी, दोनों जिले जनजाति बहुल हैं और उनकी अपनी समस्याएं हैं।

उन्होंने कहा कि नवरंगपुर जिले में आज तक रेल लाइन नहीं है जबकि देश को आजाद हुए 76 साल हो गए। ‘‘हम नवरंगपुर वासियों ने आज तक रेल लाइन नहीं देखी।’

उन्होंने कहा कि 2016 से आज 2026 आ गया लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। खान ने कहा कि जयपुर से नवरंगपुर 38 से 40 किमी और मलकानगिरी करीब 140 किमी दूर है। ‘‘इतनी सी दूरी तय करने में अब तक तो दस साल लग गए और पता नहीं कि आगे कितना समय लगेगा।’’

उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर तंज करते हुए कहा कि बीजद की मदद से आप रेल मंत्री बने लेकिन हमें 40 किलोमीटर की रेल लाइन दे नहीं पाए। उन्होंने कहा कि बीजद की मदद से वैष्णव दो दो बार इस सदन में आए लेकिन अब तक जयपुर से नवरंगपुर तक 40 किलोमीटर की रेल लाइन का संपर्क नहीं दे पाए।

काम तुरंत शुरू करने की मांग दोहराते हुए बीजद सांसद ने तल्ख लहजे में कहा “यदि इन रेल लाइनों का निर्माण नहीं हुआ, तो हम रेल मंत्री को ओडिशा आने नहीं देंगे।”

बीजद की ही सुलता देव ने कहा कि राज्य में प्राचीन जनजातियों की आबादी करीब एक लाख है जो नौ जिलों में फैली है और ये लोग बाहरी हस्तक्षेप बिल्कुल पसंद नहीं करते।

सुलता ने कहा कि यह लोग पहाड़ी इलाकों में रहते हैं और नीचे नहीं आना चाहते। उन्होंने कहा कि नवीन पटनायक नीत बीजद सरकार के समय में इन जनजातियों के कल्याण के लिए कई काम किए गए थे।

सुलता ने दावा किया कि अब इन प्राचीन आदिवासियों को विस्थापित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि इन आदिवासियों को उनकी जगहों पर रहने दिया जाए और उनके लिए स्वास्थ्य सुविधा दी जानी चाहिए, उन्हें चिकित्सा संबंधी सुविधाओं की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे लोग संस्थागत प्रसव का लाभ उठाएं।

राजद के ए डी सिंह ने ओडिशा में तटीय क्षरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसकी वजह से कई गांवों के डूबने का खतरा है। उन्होंने दावा किया कि क्षरण के कारण लोगों के लिए अजीविका चलाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि न वह समुद्र में मछली पकड़ने जा पा रहे हैं न ही खेती कर पा रहे हैं।

सिंह के अनुसार, विभिन्न शोध भी बता चुके हैं कि भारत में तट क्षरण की वजह से जितने राज्य प्रभावित होंगे उनमें से सबसे अधिक नुकसान ओडिशा को होगा।

उन्होंने सरकार से उचित कदम उठाने की मांग की।

भाषा मनीषा माधव

माधव