शिवराज के खिलाफ मानहानि का मामला वापस लेंगे तन्खा

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शिवराज के खिलाफ मानहानि का मामला वापस लेंगे तन्खा

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  • Publish Date - February 3, 2026 / 06:34 PM IST,
    Updated On - February 3, 2026 / 06:34 PM IST

नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय को मंगलवार को बताया गया कि कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ दायर आपराधिक और दीवानी मानहानि का मामला वापस लेने का फैसला किया है और दोनों ने अपना विवाद सुलझा लिया है।

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने बताया कि दोनों नेता संसद में मिले थे और तन्खा ने चौहान के खिलाफ दायर मामला वापस लेने का फैसला किया।

इस मामले में तन्खा का पक्ष वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी ने रखा था।

जेठमलानी ने कहा कि सिब्बल ने इस मामले को सुलझाने में मदद की।

पीठ ने बयान दर्ज किया कि तन्खा आपराधिक और दीवानी मानहानि का मुकदमा वापस ले लेंगे। पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की सराहना करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।

उसने कहा कि नेताओं द्वारा दिए गए बयानों से जुड़े मामलों में अदालत को बहुत सावधानी से काम लेना होता है।

तन्खा ने अधीनस्थ अदालत में अपनी शिकायत में कहा था कि 2021 में मध्य प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले मानहानिकारक बयान दिए गए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि 17 दिसंबर, 2021 को उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद, भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी समुदाय के लिए आरक्षण का विरोध किया था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

तन्खा की याचिका में 10 करोड़ रुपये के मुआवजे और वीडी शर्मा तथा पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह समेत भाजपा नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी।

यह मामला 2024 में उच्चतम न्यायालय पहुंचा, जब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया और उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किए।

उच्चतम न्यायालय ने 11 नवंबर, 2024 को भाजपा नेताओं के खिलाफ जमानती वारंट की तामील पर रोक लगा दी थी और तन्खा से जवाब मांगा था।

तन्खा की शिकायत में कहा गया था कि तीनों भाजपा नेताओं ने राजनीतिक फायदे के लिए उनके खिलाफ एक ‘समन्वित, दुर्भावनापूर्ण, झूठा और मानहानिकारक’ अभियान चलाया, जिसमें उन पर पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया गया था।

भाजपा नेताओं ने उच्च न्यायालय में आरोपों का खंडन किया था और तर्क दिया था कि तन्खा द्वारा संलग्न अखबार की खबर की कतरन मानहानि की शिकायत का आधार नहीं बन सकती और अधीनस्थ अदालत शिकायत का संज्ञान नहीं ले सकती।

उन्होंने कहा कि तन्खा द्वारा रिकॉर्ड पर रखी गई पूरी सामग्री में कथित तौर पर मानहानि तो दूर, किसी तरह का संकेत भी नहीं मिलता है।

भाषा वैभव नरेश

नरेश