बीजद संशोधित खनन कानून के विरोध में 28 सितंबर को ओडिशा विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करेगी

बीजद संशोधित खनन कानून के विरोध में 28 सितंबर को ओडिशा विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करेगी

बीजद संशोधित खनन कानून के विरोध में 28 सितंबर को ओडिशा विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करेगी
Modified Date: September 24, 2026 / 09:25 pm IST
Published Date: September 24, 2026 9:25 pm IST

भुवनेश्वर, 24 सितंबर (भाषा) ओडिशा के मुख्य विपक्षी ‘बीजू जनता दल’ (बीजद) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी संशोधित खनन कानून के विरोध में 28 सितंबर को राज्य विधानसभा के बाहर एक ‘‘विशाल रैली’’ आयोजित करेगी, जिसमें नवीन पटनायक भी हिस्सा लेंगे।

पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्रा और अन्य बीजद नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन में रैली आयोजित किए जाने का ऐलान करते हुए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम को ‘‘काला कानून’’ करार दिया।

मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस अधिनियम के जरिये केंद्र सरकार ने खदानों और खनिजयुक्त भूमि पर राज्यों के अधिकार छीन लिये हैं, जो देश के संघीय ढांचे पर हमला है। चूंकि देश के कुल उपलब्ध खनिज संसाधनों का 44 प्रतिशत हिस्सा ओडिशा में है, इसलिए इस संशोधित कानून से राज्य को सबसे अधिक नुकसान होगा।’’

मिश्रा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य के भाजपा नेता यह तर्क दे रहे हैं कि इससे ओडिशा को नुकसान के बजाय फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि इस कानून को वापस लेने की मांग को लेकर बीजद 28 सितंबर को व्यापक स्तर पर विरोध सभा आयोजित करेगा।

बीजद उपाध्यक्ष प्रताप जेना ने कहा, ‘‘पच्चीस जुलाई 2024 को उच्चतम न्यायालय की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसला सुनाया था कि राज्य सरकारें खदानों और खनिजों पर कर और उपकर लगा सकती हैं। इससे ओडिशा को बकाया राशि के रूप में एक लाख करोड़ रुपये और सालाना 12,000 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त करने का अवसर मिला था। हालांकि, इस (संशोधन) अधिनियम के लागू होने से अब यह अवसर हाथ से निकल गया है।’’

इस अवसर पर विधायक अरुण कुमार साहू ने कहा कि संशोधित खनन कानून के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी।

प्रमुख आदिवासी नेता एवं पूर्व मंत्री सुदाम मरांडी ने कहा कि अधिकांश खनन क्षेत्र आदिवासी आबादी वाले इलाकों में हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से केंद्र ने एकतरफा तरीके से इस कानून में संशोधन किया है, उससे निश्चित रूप से आदिवासी लोगों की जीवनशैली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।’’

भाषा खारी सुरेश

सुरेश


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