भाजपा ने कांग्रेस पर मतदाता सूची संशोधन के मुद्दे पर पलट जाने का आरोप लगाया
भाजपा ने कांग्रेस पर मतदाता सूची संशोधन के मुद्दे पर पलट जाने का आरोप लगाया
नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) कांग्रेस पर अपनी चुनावी हार को छिपाने के लिए मतदाता सूची में संशोधन के मामले में पलट जाने का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को विपक्षी दल को उन मौकों की याद दिलाई जब उसके नेताओं ने सूची को ठीक करने की मांग की थी।
भाजपा ने सवाल किया कि जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान बिना विशेष सघन पुनरीक्षण के लाखों नाम जोड़े और हटाए गए थे, तब कांग्रेस ने कोई आपत्ति क्यों नहीं की थी।
भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता में कहा कि कांग्रेस ने पहले मतदाता सूची से दोहराव वाले और अपात्र नाम हटाने की मांग की थी, लेकिन अब वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध कर रही है।
यादव ने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक रूप से इस तरह पलट जाना ‘सुविधा की राजनीति’ का सीधा उदाहरण है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपनी ‘‘चुनावी नाकामियों को छिपाने’’ के लिए एक विमर्श गढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने खुद ही पहले कहा था कि आंध्र प्रदेश, राजस्थान और केरलम जैसे राज्यों में मतदाता सूची में दोहराव वाले नाम और मृत लोगों के नाम शामिल हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उसी पार्टी ने उन नामों को हटाने की मांग की थी और कहा था कि अगर सूची से ऐसे नाम नहीं हटाए गए तो यह धोखाधड़ी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘अब जब वे नाम हटा दिए गए हैं, तो कांग्रेस पार्टी अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए सुविधा की राजनीति कर रही है।’’
यादव ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और केरलम का उदाहरण देते हुए कहा कि मतदाता सूची में संशोधन की कांग्रेस की पुरानी मांगें बाद में किये गये एसआईआर के दौरान नाम हटाने के काम जैसी ही थीं।
उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश में 2018 में कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि मतदाता सूची में लगभग 50 लाख नाम दोहराव वाले हैं और सूची की ‘शुद्धता’ बनाए रखने के लिए उन्हें हटाने की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि बाद में 2026 में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से 44.28 लाख नाम हटाए गए।
यादव ने कहा, ‘‘2018 में कांग्रेस पार्टी कह रही थी कि अगर दोहराव वाले नाम और मृत मतदाताओं के नाम नहीं हटाए गए, तो यह लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी होगी। और जब असल में नाम हटाए जा रहे हैं, तो कांग्रेस पार्टी आज क्या कह रही है — यह भी हम सब देख रहे हैं।’’
तेलंगाना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक नेता ने दावा किया था कि मतदाता सूची में लगभग 70 लाख नाम दोहराव वाले या गलत हैं और उन्होंने उन्हें हटाने की मांग की थी।
यादव ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी का एक ‘क्लिप’ चलाया।
इस क्लिप में सिंघवी कह रहे हैं, ‘‘तेलंगाना की मतदाता सूची में करीब 50 लाख नाम दोहराव वाले हैं। लगभग 20 लाख मतदाता गायब हैं; जिन्हें हम तथाकथित रूप से हटाए गए मतदाता कह सकते हैं।’’
यादव ने कांग्रेस नेता के बयान का हवाला देते हुए कहा, ‘‘अगर उन नामों को नहीं हटाया गया, तो यह चुनावों और लोकतंत्र के कामकाज के साथ धोखाधड़ी होगी।’’
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि बाद में एसआईआर के दौरान तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 73.39 लाख नाम हटाये गये।
उन्होंने राजस्थान का भी ज़िक्र किया, जहां कांग्रेस ने 15 अगस्त 2018 को आरोप लगाया था कि लगभग 42 लाख नाम दोहराव वाले हैं और कांग्रेस ने उन्हें हटाने की मांग की थी।
यादव के अनुसार, राज्य में एसआईआर के दौरान लगभग 41.85 लाख नाम हटाए गए।
भाजपा प्रवक्ता ने बताया कि केरलम में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि 4.34 लाख नाम दोहराव वाले नाम हैं; पार्टी के एक नेता ने ये नाम एक वेबसाइट पर अपलोड किए थे और चुनाव से पहले उन्हें हटाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
उन्होंने दावा किया कि बाद में एसआईआर के ज़रिए दोहराव वाले 8.57 लाख नामों की पहचान की गई और उन्हें हटा दिया गया।
यादव ने केरलम में एसआईआर के बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया का हवाला दिया जहां कांग्रेस चुनाव जीत गयी।
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘केरलम में एसआईआर किया गया और कांग्रेस पार्टी जीत गई। जिन नामों की उन्होंने पहचान की थी, उन्हें हटा दिया गया क्योंकि वे दोहराव वाले नाम थे।’’
यादव ने कहा,‘‘ वे (कांग्रेस नेता) सामने आये और उन्होंने कहा कि एसआईआर बहुत मददगार रही और यह एक बहुत अच्छी कवायद थी। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी ने मतदाता सूची में गलत नाम शामिल किए थे, जिससे यह समस्या हुई थी, और वे जीत गए।’’
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पार्टी का रुख़ उसके राजनीतिक फ़ायदे के हिसाब से बदल गया।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस पार्टी के ये रुख और सुविधा की राजनीति समय-समय पर बदलती रहती है। वे अपने राजनीतिक हितों के हिसाब से बदलते हैं।’’
उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि 2013 में निर्वाचन आयोग के एक सर्वे में 76 लाख ‘फ़र्ज़ी मतदाता’, मृत मतदाता और दोहराव नाम पाए गए थे।
उन्होंने बताया कि उस समय केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार सत्ता में थी।
उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर 2025 में बिहार में हुए एसआईआर के नतीजतन मतदाता सूची से 65 लाख नाम हटाए गए।
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश

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