प्रसूताओं की मौत के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार, पीड़ित परिजन को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए: खाचरियावास

प्रसूताओं की मौत के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार, पीड़ित परिजन को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए: खाचरियावास

प्रसूताओं की मौत के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार, पीड़ित परिजन को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए: खाचरियावास
Modified Date: July 14, 2026 / 03:00 pm IST
Published Date: July 14, 2026 3:00 pm IST

जयपुर, 14 जुलाई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में हाल में हुई कई प्रसूताओं की मौत के लिए राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मृतकों के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मंगलवार को मांग की।

खाचरियावास ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इन मौतों की जिम्मेदारी लेने से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पर मामले में पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाने का आरोप लगाया।

खाचरियावास ने दावा किया कि अब तक 19 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि दो महिलाओं की आंखों की रोशनी चली गई है और छह महिलाओं की किडनी खराब हो गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के पीछे भाजपा सरकार की ओर से खरीदी गई घटिया और नकली दवाएं जिम्मेदार हैं।

खाचरियावास ने कहा, “सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। अगर नकली दवाएं खरीदी गईं, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

उन्होंने मृतक महिलाओं के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने और स्थायी रूप से दिव्यांग हुई महिलाओं के लिए दीर्घकालिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

कांग्रेस नेता ने दवाओं की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार लोगों की जान जोखिम में डाल रही है।

खाचरियावास की यह प्रतिक्रिया स्वास्थ्य मंत्री खींवसर की ओर से सोमवार को दिए गए उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत का कोई एक समान कारण नहीं है।

खींवसर ने कहा था कि इन मामलों में महिलाओं की मौत खून की कमी, उच्च रक्तचाप, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) और कुपोषण जैसी विभिन्न चिकित्सीय जटिलताओं के कारण हुई। उन्होंने कहा था कि ज्यादातर महिलाएं उच्च जोखिम वाली मरीज थीं, जिन्हें अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से सरकारी अस्पतालों में रेफर किया गया था।

भाषा

बाकोलिया नरेश पारुल

पारुल


लेखक के बारे में