चेन्नई, 20 सितंबर (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता टी. के. एस. एलंगोवन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर क्षेत्रीय दलों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने का रविवार को आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कमजोर स्थिति के बीच केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा क्षेत्रीय दलों को अपने लिए बड़ा खतरा मानती है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन से जुड़े एक मामले में समन जारी किए जाने और दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल के परिवार को नोटिस भेजे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए एलंगोवन ने आरोप लगाया कि भाजपा क्षेत्रीय दलों को अपने लिए बड़ा खतरा मानती है।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा क्षेत्रीय दलों से बहुत डरी हुई है क्योंकि कांग्रेस कमजोर है।’’
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दल अब भाजपा के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हो रहे हैं।
एलंगोवन ने तीसरा मोर्चा बनाने के बजाय विपक्ष की मजबूत एकता के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता एम. वी. राजन के आह्वान का समर्थन करते हुए कहा कि वैचारिक रूप से ये सभी दल भाजपा के विरोधी हैं और लोगों के सामने उसकी नीतियों को उजागर कर वोट हासिल करना चाहते हैं।
उन्होंने भाजपा पर लोकतांत्रिक भारत को ‘‘एकाधिकारवादी भारत’’ में बदलने की कोशिश करने और लोगों की शिकायतों का समाधान करने से इनकार कर ‘‘देश के राजा’’ की तरह व्यवहार करने का भी आरोप लगाया।
तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार पर निशाना साधते हुए द्रमुक नेता ने दावा किया कि वह पिछले 100 दिन में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह ‘‘विफल’’ रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘केवल कल ही आठ हत्याएं हुईं।’’ एलंगोवन ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी अपनी हालिया विफलताओं का जवाब न होने के कारण द्रमुक के खिलाफ 50 साल पुराने आरोप उठा रही है।
द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन के हाल में कहा कि उन्हें आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत अपनी गिरफ्तारी साबित करने की जरूरत नहीं है। एलंगोवन ने स्टालिन के इस बयान पर कहा कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति इस्माइल आयोग पहले ही गिरफ्तारी की पुष्टि कर चुका है।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें यह साबित करने की जरूरत क्यों है कि उन्हें मीसा के तहत गिरफ्तार किया गया था?’’
एलंगोवन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस दावे से भी सहमति जताई कि व्यवस्था विद्यार्थियों को दबा रही है। उन्होंने कहा कि किसी उचित मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ संघर्ष करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचित सरकारों का यह संवैधानिक दायित्व है कि वे आंदोलनकारियों से मिलें और उनकी शिकायतों का समाधान करें, न कि उनकी आवाज दबाएं।
भाषा
सिम्मी संतोष
संतोष