(प्रदीप्त तापदार)
कोलकाता, चार अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस महीने होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों को पहचान, जनसांख्यिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर लड़ी जाने वाली एक व्यापक वैचारिक लड़ाई करार दिया है।
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा राज्य की सत्ता में आती है, तो वह ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कार्रवाई करेगी, भले ही ऐसा करने पर उसे सांप्रदायिक करार दिया जाए।
भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि इस महीने होने वाला चुनाव केवल भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि ‘‘बंगाली हिंदुओं के अस्तित्व’’ और साथ ही ‘‘राष्ट्रवादी, तार्किक विचारों वाले मुसलमानों’’ के लिए एक निर्णायक सभ्यतागत लड़ाई है।
भाजपा नेता ने अपनी पार्टी की राजनीतिक रणनीति को बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों, पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों की ‘‘बदलती जनसांख्यिकी’’, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)प्रक्रिया और तृणमूल कांग्रेस की ‘‘अल्पसंख्यक तुष्टीकरण’’ की नीति से जोड़ा।
भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘मैंने कहा है कि यह चुनाव (अगर तृणमूल कांग्रेस राज्य में सत्ता में वापस आती है) न केवल बंगाली हिंदुओं के लिए बल्कि राष्ट्रवादी, तार्किक विचारों वाले मुसलमानों के लिए भी आखिरी चुनाव है।’’
उन्होंने बांग्लादेश में राजनीतिक घटनाक्रम और पश्चिम बंगाल की स्थिति की तुलना करते हुए कहा, ‘‘बांग्लादेश में हमने जो कट्टरता देखी है, उसके कारण हिंदुओं की हत्याएं हुईं, हिंदू महिलाओं का अपहरण कर उनका धर्मांतरण कराया गया, लेकिन सुन्नी मुसलमानों की भी हत्याएं हुईं।’’
भट्टाचार्य से जब सवाल किया गया कि क्या पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने पर भाजपा ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कार्रवाई करेगी, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, ‘‘हां। यह हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है। हम राज्य में ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ को समाप्त करेंगे।’’
भाजपा नेता से जब कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई करने पर उनकी पार्टी पर सांप्रदायिक राजनीति करने के आरोप लग सकते हैं, तो भट्टाचार्य ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें सांप्रदायिक कहने दें, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। पश्चिम बंगाल में ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ कौन कर रहा है?’’
भट्टाचार्य ने इन शब्दों के अर्थ समझाते हुए कहा, ‘‘लव जिहाद का अभिप्राय है कि कोई व्यक्ति खुद को हिंदू बताकर, ‘झोंटू’ होने का नाटक करके, किसी लड़की के साथ रिश्ता बनाता है और तभी अपना धर्म प्रकट करता है, जब वह लड़की भी उसमें शामिल हो जाती है।’’
ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह संकेत देती हैं कि भाजपा पश्चिम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार के दौरान पहचान और घुसपैठ के मुद्दे को प्रमुखता से शामिल करने की तैयारी कर रही है, जैसा कि उसने असम और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में किया था।
भट्टाचार्य ने दावा किया कि भारत की सीमा से लगे बांग्लादेश के जिलों में जमात-ए-इस्लामी के हालिया चुनावी प्रदर्शन ने भाजपा की चिंताओं को और मजबूत किया है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह चिंताजनक और खतरनाक है। हमारे सभी सीमावर्ती जिलों की जनसंख्यिकी बदल गई है। पश्चिम बंगाल को आधार बनाकर, उसकी भूमि का उपयोग पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के वन क्षेत्रों की जनसांख्यिकी को बदलने के लिए किया गया है।’’
भट्टाचार्य ने कथित जनसांख्यिकीय बदलाव को ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ से जोड़ा।
उन्होंने दावा किया, ‘‘‘लव जिहाद’ के साथ-साथ ‘लैंड जिहाद’ भी शुरू हो गया है। बांग्लादेशी आदिवासी लड़कियों से शादी कर उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद को आधार बनाकर बांग्लादेशी घुसपैठिए अलग-अलग जगहों पर फैल चुके हैं।’’
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने विभिन्न घटनाओं की एक शृंखला को एक साथ जोड़कर घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव का एक व्यापक राजनीतिक विमर्श पेश करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर हमारी कही हर बात गलत है, तो एसआईआर प्रक्रिया शुरू होते ही नोएडा और गुरुग्राम अचानक रातोंरात खाली क्यों हो गए? लोग अचानक घरेलू सहायक क्यों नहीं ढूंढ पा रहे हैं?’’
भट्टाचार्य ने राजारहाट और साल्ट लेक के पास एक झुग्गी बस्ती में हाल ही में लगी आग का भी जिक्र किया, और सुझाव दिया कि इससे एक व्यापक प्रवृत्ति का पता चलता है।
उन्होंने कहा, ‘‘राजरहाट के पास झुग्गी बस्ती में लगी आग का मामला लीजिए। आग लगने के बाद कितने ही लोग लापता हो गए। वे कहां गए? वे क्यों गए?’’
भट्टाचार्य ने हालांकि कहा कि यह मुद्दा हिंदू-मुस्लिम राजनीति से परे है और उनके शब्दों में, यह चरमपंथ के खिलाफ वैश्विक संघर्ष का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिये, मुद्दा धार्मिक कट्टरता और चरमपंथीकरण का है, जो मानव सभ्यता के लिए अभिशाप है। यूरोप प्रभावित है, अमेरिका का कुछ हिस्सा प्रभावित है, कनाडा ने तो लगभग आत्मसमर्पण कर दिया है।’’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘‘इस्लामी देशों में भी संघर्ष होता है। इसलिए, आज असली धर्म लोकतंत्र है और असली राजनीति उग्रवाद और चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई है।’’
भट्टाचार्य ने कहा कि आलोचना के बावजूद भाजपा इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाना जारी रखेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम जो कुछ भी कह रहे हैं, वह सबके सामने है। लेकिन जब भी हम इसे संसद में उठाते हैं, किसी के पास कोई जवाब नहीं होता। हम इसे उठाते रहेंगे। हमें इस बात की परवाह नहीं है कि दूसरे हमारे बारे में क्या कहते हैं।’’
भट्टाचार्य ने भाजपा की राजनीति को एक दीर्घकालीन वैचारिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा, ‘‘हम 1950 के दशक से ही इस मुद्दे पर राजनीति करते आ रहे हैं। सभी राजनीतिक दल ने हमारा विरोध किया है।’’
उन्होंने अप्रत्याशित रूप से वाम नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु का जिक्र किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मुझे ज्योति बसु की कही एक बात याद आ रही है,‘जब सब मिलकर आपका विरोध करें, तो इसका अभिप्राय है कि आप सही बात कह रहे हैं और सही रास्ते पर चल रहे हैं।’ तमाम विरोधों के बावजूद, देखिए आज हम कहां हैं।’’
भट्टाचार्य ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)की प्रक्रिया का पुरजोर तरीके से बचाव किया, जो चुनावों से पहले सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक के रूप में उभरा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि वास्तविक मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है और उन्हें मतदान की प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से जब पूछा गया कि एसआईआर प्रक्रिया से पार्टी को फायदा होगा या नुकसान, तो उन्होंने कहा, ‘‘देश सर्वोपरि है। हम जीतें या हारें, यह बड़ा मुद्दा नहीं है। एसआईआर का उद्देश्य त्रुटिमुक्त और सही मतदाता सूची तैयार करना है। यही इसका उद्देश्य है और इसे हासिल किया जाएगा।’’
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना के लिए चार मई की तारीख तय की गई है।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप