कोलकाता, चार अप्रैल (भाषा) भारतीय टेनिस के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस ने शनिवार को कहा कि उन्हें वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत की बोली से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिसे उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी नई भूमिका का अहम हिस्सा बताया।
सात बार के ओलंपियन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें युवा विकास और खेल पर काम करने के साथ-साथ 2036 में ओलंपिक की मेजबानी करने के देश के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करने का कार्य सौंपा है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद कोलकाता में अपनी पहली प्रेसवार्ता में पेस ने कहा, ‘‘मोदी जी ने मुझे युवाओं और खेल के लिए काम करने का एक स्पष्ट दृष्टिकोण दिया है। उन्होंने मुझे 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी सौंपी है। मुझे इस देश में ओलंपिक लाने के लिए एक टीम के साथ कड़ी मेहनत करनी होगी।’’
उन्होंने यह भी कहा कि वह पश्चिम बंगाल में खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और युवा विकास के लिए काम करना चाहते हैं, और राज्य से ‘प्रतिभा पलायन’ को रोकना चाहते हैं।
पेस ने यह भी कहा कि वह गुजरात में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में योगदान देंगे।
दिग्गज टेनिस खिलाड़ी ने कहा कि ओलंपिक खेलों की मेजबानी से भारत के खेल जगत में बदलाव आ सकता है और वैश्विक स्तर पर इसकी स्थिति मजबूत हो सकती है।
खेलों में सफलता और आर्थिक मजबूती के बीच तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि 2024 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में शीर्ष पदक जीतने वाले देश (जिनमें अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ग्रेट ब्रिटेन शामिल हैं) विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में भी शामिल हैं।
पेस ने कहा कि भारत को एक मजबूत खेल संस्कृति का निर्माण करने के साथ बुनियादी ढांचे तथा जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकास में निवेश करके इसी तरह की सफलता प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘खेलों और खेल शिक्षा में ही महाशक्ति बनने की क्षमता निहित है।’’
पेस ने पश्चिम बंगाल में खेल बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि राज्य में अब भी एक भी इनडोर टेनिस स्टेडियम नहीं है और डेविस कप जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए अक्सर अस्थायी लकड़ी के कोर्ट का उपयोग किया जाता है।
पेस ने कहा कि उनका व्यापक लक्ष्य अगले दो दशकों में खेल और शिक्षा के माध्यम से 25 करोड़ बच्चों के जीवन को प्रभावित करना है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा देश की ओलंपिक आकांक्षाओं और वैश्विक उत्थान में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
खेल जगत से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने को ‘नया खेल’ बताते हुए पेस ने कहा कि वह इस जिम्मेदारी को उसी जुनून और प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगे, जिसने उनके टेनिस करियर को परिभाषित किया था।
खुद को ‘बंगाल का पूत’ बताते हुए पेस ने कोलकाता में अपनी जड़ों पर प्रकाश डाला और कहा कि राज्य के युवाओं को बंगाल में ही विकसित होने के अवसर दिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहीं का हूं। यहीं जन्मा, यहीं से मेरा बचपन शुरू हुआ। मेरी मां बंगाली थीं।’’ पेस ने क्रिकेट और फुटबॉल के अलावा राज्य में अन्य खेल से जुड़े बुनियादी ढांचे की कमी पर चिंता जतायी।
खेल में अपने शुरुआती वर्षों को याद करते हुए पेस ने कहा कि क्रिकेट के लिए ईडन गार्डन्स और फुटबॉल के लिए साल्ट लेक स्टेडियम जैसे प्रमुख मैदानों की मौजूदगी के बावजूद, अन्य खेलों के लिए बुनियादी ढांचा सीमित ही रहा है।
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘‘जब मैं 1980 में कोलकाता में बड़ा हो रहा था, तब कोई बुनियादी ढांचा नहीं था। अन्य खेल खेलने वाले हर बच्चे के लिए बंगाल में क्या उपलब्ध है?’’
पेस ने यह भी कहा कि एक सदी से अधिक समय में राज्य ने मुट्ठी भर ओलंपिक पदक विजेता ही दिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘1900 से आज तक पश्चिम बंगाल से केवल चार लोगों ने ही ओलंपिक पदक जीते हैं। 100 वर्षों से हम ओलंपिक के लिए क्या कर रहे हैं?’’
प्रधानमंत्री के साथ अपनी बातचीत के बारे में बताते हुए पेस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने युवा विकास और खेल को प्रमुख क्षेत्र बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने प्रधानमंत्री से कहा कि मैं बंगाल को वृद्धाश्रम नहीं बनाना चाहता। मैं बंगाल के युवाओं का जीवन संवारना चाहता हूं। मेरा सपना है कि बंगाल से प्रतिभा पलायन न हो।’’
पेस ने कहा कि वह खेल उत्कृष्टता के माध्यम से बंगाल को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर फिर से गौरव दिलाना चाहते हैं। पेस ने राज्य से युवा प्रतिभाओं के पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘यह देखकर दुख होता है कि कितने बच्चे शिक्षा, व्यवसाय या अवसरों के लिए पश्चिम बंगाल से बाहर जा रहे हैं।’’
भाषा संतोष दिलीप
दिलीप