कैग ने जम्मू विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और नियामकीय खामियों को उजागर किया

कैग ने जम्मू विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और नियामकीय खामियों को उजागर किया

कैग ने जम्मू विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और नियामकीय खामियों को उजागर किया
Modified Date: April 15, 2026 / 05:56 pm IST
Published Date: April 15, 2026 5:56 pm IST

जम्मू, 15 अप्रैल (भाषा) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने जम्मू विश्वविद्यालय के कामकाज में कई शैक्षणिक, नियामकीय और प्रशासनिक खामियों को उजागर किया है, जिनमें अनिवार्य मंजूरी के बिना पाठ्यक्रम संचालित करना भी शामिल है।

कैग ने सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को अपनी संबद्धता प्रक्रिया को मजबूत करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल नियामकीय मानदंडों को पूरा करने वाले संस्थानों को ही संबद्धता प्रदान की जाए। इसके साथ ही शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए व्यापक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने को भी कहा गया है।

उद्योग से कमजोर जुड़ाव, मूल्यांकन में देरी और खराब प्लेसमेंट परिणामों जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दिलाया गया है।

कैग की 31 मार्च, 2024 को समाप्त हुए वर्ष के लिए रिपोर्ट में, विश्वविद्यालय आठ संकायों में डिप्लोमा और प्रमाण पत्र कार्यक्रमों के अलावा 38 डॉक्टरेट, 24 एमफिल, 50 स्नातकोत्तर और 19 स्नातक पाठ्यक्रमों सहित कई प्रकार के कार्यक्रम संचालित रहा था।

हालांकि, ऑडिट में पाया गया कि विश्वविद्यालय को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से केवल दो तकनीकी कार्यक्रमों एमबीए और एमसीए के लिए ही मंजूरी मिली थी, जबकि चार अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम बिना मंजूरी के संचालित किए जा रहे थे। इसके अलावा, एमसीए कार्यक्रम को राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं थी, जिससे छात्रों को गुणवत्ता आश्वासन के लाभ से वंचित किया जा रहा था।

रिपोर्ट में शैक्षणिक मानकों के उल्लंघन को भी उजागर किया गया, जिसमें एआईसीटीई मॉडल पाठ्यक्रम का पालन न करना और एमटेक कंप्यूटर साइंस जैसे कार्यक्रमों में आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी शामिल है।

डिग्री संबंधी मानदंडों पर कैग ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशानिर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम नामकरण को तैयार करने में विफल रहा। होटल मैनेजमेंट में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए-एचएम) पाठ्यक्रम यूजीसी नियमों का उल्लंघन करते हुए पुराने नामकरण और अवधि के साथ जारी रहा।

ऑडिट में यह भी पाया गया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त किए बिना शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘विश्वविद्यालय ने न तो अनिवार्य स्वीकृतियां प्राप्त कीं और न ही प्रवेश और संकाय आवश्यकताओं के लिए निर्धारित मानदंडों का पालन किया।’’

शैक्षणिक सहयोग के संदर्भ में, कैग ने उद्योग-अकादमिक जुड़ाव मजबूत नहीं होने के लिए भी विश्वविद्यालय की आलोचना की। कैग ने कहा, ‘राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ हस्ताक्षरित 26 समझौता ज्ञापनों में से केवल दो ही पूरी तरह से कार्यान्वित थे, जबकि 20 निष्क्रिय रहे। 2019 में स्थापित उद्योग-अकादमिक साझेदारी केंद्र भी बुनियादी ढांचे की कमी के कारण निष्क्रिय पाया गया।’’

भाषा आशीष माधव

माधव


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