कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मादक पदार्थ जब्ती की वीडियोग्राफी न होने पर चार लोगों की दोषसिद्धि रद्द की

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मादक पदार्थ जब्ती की वीडियोग्राफी न होने पर चार लोगों की दोषसिद्धि रद्द की

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मादक पदार्थ जब्ती की वीडियोग्राफी न होने पर चार लोगों की दोषसिद्धि रद्द की
Modified Date: June 27, 2026 / 12:04 pm IST
Published Date: June 27, 2026 12:04 pm IST

अमिताभ रॉय

कोलकाता, 27 जून (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 525 किलोग्राम मादक पदार्थ की जब्ती प्रक्रिया की वीडियोग्राफी नहीं किए जाने और साक्ष्य जुटाने में लापरवाही को लेकर पुलिस के प्रति नाराजगी जताते हुए मामले में चार लोगों की दोषसिद्धि रद्द कर दी है।

नादिया जिले के कृष्णानगर की एक अदालत ने समीर दास, जाहिरुद्दीन शेख, गोपाल दास और बिजय बिस्वास को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी लेकिनउच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि अधिकारियों को छापेमारी और जब्ती की वीडियोग्राफी सुनिश्चित करने का बार-बार निर्देश दिया गया है लेकिन ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि वे इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और इसके कारण वे ही बेहतर जानते हैं।’’

न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी और न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा राय की खंडपीठ ने कहा, ‘‘हैरानी की बात है कि विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और अन्य अधिकारी जांच एवं माप उपकरण समेत कई तरह के उपकरण साथ रखते हैं लेकिन वे तलाशी और जब्ती की वीडियोग्राफी के लिए कोई उपकरण नहीं ले जाते।’’

खंडपीठ ने 24 जून को सुनाए फैसले में कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष जब्ती प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करा सकता था और स्वतंत्र गवाहों की मदद से भी मामला साबित कर सकता था, लेकिन रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से पता चलता है कि अभियोजन पक्ष जब्ती प्रक्रिया की कोई वीडियोग्राफी पेश करने में विफल रहा।’’

अदालत ने कहा कि पूरी संभावना है कि सभी अधिकारियों के पास स्मार्टफोन रहे होंगे और वे तलाशी एवं जब्ती की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कर सकते थे या अपने फोन से तस्वीरें ले सकते थे लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय समेत विभिन्न अदालतों के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी उन्होंने वीडियोग्राफी नहीं की।

पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने वीडियोग्राफी संबंधी निर्देश का पालन किए बिना छापेमारी दल में शामिल गवाहों पर भरोसा किया।

अदालत ने कहा, ‘‘हम उन गवाहों पर भरोसा करने के पक्ष में नहीं हैं जो छापेमारी करने वाली टीम के सदस्य थे।’’

अदालत ने यह भी कहा कि 525 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया था लेकिन सूची 549 किलोग्राम मादक पदार्थ की तैयार की गई।

पीठ ने कहा कि नमी के कारण मादक पदार्थ का वजन बढ़ने संबंधी टिप्पणी के समर्थन में कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया और न ही किसी गवाह ने इस बारे में बयान दिया। अदालत ने कहा कि यदि ऐसा हुआ भी था तो जब्ती के बाद इन पदार्थों के भंडारण पर सवाल उठता है।

मादक पदार्थ की कथित जब्ती 23 मई 2021 को नादिया जिले के नकाशीपाड़ा थाना क्षेत्र में की गई थी और चारों व्यक्तियों को 19 जुलाई 2024 को सजा सुनाई गई थी।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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