बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव के लिए प्रचार थमा

बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव के लिए प्रचार थमा

बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव के लिए प्रचार थमा
Modified Date: April 27, 2026 / 07:21 pm IST
Published Date: April 27, 2026 7:21 pm IST

कोलकाता, 27 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के लिए प्रचार सोमवार शाम थम गया, जिसमें मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), घुसपैठ, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी सहित अन्य मुद्दों को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए तथा मतदाताओं से कई लुभावने वादे किए।

दूसरे चरण में राज्य के 142 विधानसभा क्षेत्रों में 29 अप्रैल को मतदान होगा, जिसमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाओं और 792 तृतीय-लिंग के मतदाताओं समेत कुल 3,21,73,837 मतदाता मतदान के पात्र हैं।

दूसरे चरण के चुनाव के लिए 41,001 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। सभी मतदान केंद्रों की गतिविधियों का वेबकास्टिंग के माध्यम से प्रसारण किया जाएगा।

धुआंधार प्रचार अभियान के दौरान भाजपा नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस पर पश्चिम बंगाल को घुसपैठियों का अड्डा बनाने का आरोप लगाया। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा विभाजनकारी राजनीति में लिप्त है और वह मछली एवं अंडे के सेवन को हतोत्साहित कर रही है।

निर्वाचन आयोग ने दूसरे चरण के चुनाव के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है और सात जिलों में केंद्रीय बलों की 2,321 कंपनियों को तैनात किया है।

कुल 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए कैमरों से लैस ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा। कोलकाता में केंद्रीय बलों की 273 कंपनियों के साथ सबसे अधिक तैनाती है।

दूसरे चरण के चुनाव में जिन विधानसभा क्षेत्रों में वोट डाले जाने हैं, उनमें भांगर में सबसे ज्यादा 19 उम्मीदवार, जबकि गोघाट में सबसे कम पांच प्रत्याशी हैं। इस चरण में जिन प्रमुख उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत का फैसला होना है, उनमें ममता भी शामिल हैं। ममता भवानीपुर से एक बार फिर चुनाव लड़ रही हैं। इस सीट पर उन्हें भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से कड़ी चुनौती मिल रही है।

कोलकाता पोर्ट में वरिष्ठ तृणमूल नेता फिरहाद हकीम का मुकाबला भाजपा उम्मीदवार राकेश सिंह से है। अल्पसंख्यक बहुल इस निर्वाचन क्षेत्र को मध्य कोलकाता में सत्तारूढ़ पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अन्य महत्वपूर्ण सीटों में भाटपारा, जगतदल और बैरकपुर, बनगांव, दमदम, संदेशखाली, हिंगलगंज, राणाघाट उत्तर, राणाघाट दक्षिण, रासबिहारी, यादवपुर और बेलीगंज शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव प्रचार के दौरान कानून-व्यवस्था में कथित गिरावट, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, राजनीतिक हिंसा, घुसपैठ और भ्रष्टाचार को लेकर तृणमूल को घेरा।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रचार करने वाले मोदी ने मतुआ समुदाय के मतदाताओं से आग्रह किया कि वे नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर तृणमूल के “झूठ” से गुमराह न हों और उन्हें भरोसा दिलाया कि सभी शरणार्थियों को देश में स्थायी निवास दिया जाएगा।

शाह ने विभिन्न रैलियों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर भाजपा बंगाल में सत्ता में आती है, तो वह मवेशियों की तस्करी को रोकने और कथित “गुंडा राज” एवं “सिंडिकेट राज” को खत्म करने के लिए एक विशेष दस्ता गठित करेगी।

एक रैली में गृह मंत्री ने ममता पर तस्करों की मदद करने का आरोप लगाते हुए कहा, “पांच मई के बाद हम मवेशियों की तस्करी रोकने, मवेशियों की रक्षा करने और मवेशी माफिया को खत्म करने के लिए एक विशेष दस्ता गठित करेंगे।”

उन्होंने कहा, “अगर भाजपा सरकार बनाती है, तो राज्य में ‘गुंडा राज’ और ‘सिंडिकेट राज’ का अंत हो जाएगा। बेखौफ होकर मतदान करें। निर्वाचन आयोग ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की है और कोई भी आपको वोट डालने से नहीं रोक पाएगा। हर बूथ पर सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) तैनात है और पहले चरण में ममता बनर्जी का एक भी गुंडा अपने ठिकाने से बाहर नहीं निकल पाया।”

शाह ने तृणमूल सरकार पर शासन, कानून-व्यवस्था और रोजगार के मोर्चों पर विफल रहने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को आतंक, दंगों और घुसपैठियों से मुक्त करने के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण है।

शाह ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर को मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद का निर्माण शुरू करने की अनुमति दी गई थी।

उन्होंने मतदाताओं को चार मई (मतगणना का दिन) के बाद ‘भाईपो टैक्स’ समाप्त करने का भरोसा दिलाया।

शाह ने वादा किया कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो महिलाओं और बेरजोगार युवाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता तथा राज्य परिवहन में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की व्यवस्था की जाएगी।

जवाब में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने चुनावी वादों को पूरा करने में नाकाम रही है, जिनमें “हर व्यक्ति के बैंक खाते में 15 लाख रुपये डालना और हर साल दो करोड़ नौकरियां सृजित करना” शामिल है।

वहीं, ममता ने 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के बाद एक चुनावी रैली में दावा किया कि उनकी पार्टी ने अभी से 100 का आंकड़ा पार कर लिया है और राज्य में उसकी सत्ता बरकरार रहेगी।

तृणमूल सुप्रीमो ने भवानीपुर में आयोजित एक रैली में कहा, “पहले चरण में 152 सीट पर मतदान हुआ। हम पहले चरण में ही 100 सीट का आंकड़ा पार कर चुके हैं। बाकी 142 सीट पर मतदान 29 अप्रैल को होगा। अगर आप सभी हमें वोट देंगे, तो हमें दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा।”

बंगाल में पहले चरण के चुनाव में रिकॉर्ड 93.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।

ममता ने चुनाव के बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं को “उल्टा लटकाए जाने” की शाह की कथित टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए और कहा कि उनकी पार्टी शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी।

ममता ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जाने पर भी चिंता जताई। तृणमूल सुप्रीमो ने निर्वाचन आयोग की ओर से नियुक्त अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें कथित ज्यादतियों के खिलाफ चेतावनी दी।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी राज्य में पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी 25 साल के अंतराल के बाद बहरामपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

भाषा पारुल माधव

माधव


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