क्या सरकार बिना नोटिस के प्रार्थना स्थल सील कर सकती है : अदालत ने पूछा

क्या सरकार बिना नोटिस के प्रार्थना स्थल सील कर सकती है : अदालत ने पूछा

क्या सरकार बिना नोटिस के प्रार्थना स्थल सील कर सकती है : अदालत ने पूछा
Modified Date: March 30, 2026 / 12:08 am IST
Published Date: March 30, 2026 12:08 am IST

प्रयागराज, 29 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या वह बिना नोटिस दिए या संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बगैर किसी प्रार्थना स्थल को सील कर सकती है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने एहसान अली नाम के व्यक्ति द्वारा दायर एक रिट याचिका पर 18 मार्च को यह आदेश पारित किया। अली ने मुजफ्फरनगर में एक मस्जिद को सील किए जाने के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया।

अदालत ने कहा, ‘‘क्या बिना पूर्व नोटिस के या याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बगैर निर्माणाधीन प्रार्थना स्थल को सील करने का कानून के तहत कोई अधिकार है।’’

इस साथ ही अदालत ने यह भी पूछा कि क्या प्रार्थना स्थल के परिसर के भीतर निर्माण आदि करने वाले जमीन मालिकों को राज्य सरकार से कोई पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता एहसान अली ने दलील दी कि वह एक भूखंड का कानूनी मालिक है। उसने यह भूमि विधिवत पंजीकृत बिक्री विलेख के जरिए 2019 में प्रवीण कुमार जैन नाम के व्यक्ति से खरीदी थी।

जब मालिकों द्वारा जमीन के चारों ओर चारदीवारी खड़ी करनी शुरू की गई तो अधिकारियों ने जमीन पर निर्मित मस्जिद को हाल ही में सील कर दिया। यह कार्रवाई इस आधार पर की गई कि निर्माण अवैध है और सक्षम प्राधिकरण से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि परिसर को सील करने से पहले उसे कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का कोई अवसर दिया गया।

अदालत ने राज्य सरकार को इस याचिका पर जवाब दाखिल करने और उस कानून के बारे में अवगत कराने को कहा जिसके तहत यह कार्रवाई की गई।

भाषा सं राजेंद्र

गोला

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