नौंवे राष्ट्रपति के चुनाव में प्रत्याशियों ने की थी दूरदर्शन, आकाशवाणी पर प्रचार के मौके की मांग

नौंवे राष्ट्रपति के चुनाव में प्रत्याशियों ने की थी दूरदर्शन, आकाशवाणी पर प्रचार के मौके की मांग

: , June 23, 2022 / 06:43 PM IST

(दीपक रंजन)

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशियों के चयन और उनके बीच प्रतिद्वंद्विता तो लगभग हर चुनाव में देखने को मिलती है, लेकिन देश के शीर्ष पद के लिए हुए चुनाव में एक बार ऐसा भी हुआ है जब दो प्रत्याशियों ने बाकायदा प्रचार के लिए चुनाव आयोग व सरकार से दूरदर्शन और आकाशवाणी पर मौका मुहैया कराने का आग्रह किया।

देश के नौंवे राष्ट्रपति के चुनाव में आर वेंकट रमण के मुख्य प्रतिद्वन्द्वी रहे वी कृष्णा अय्यर ने तत्कालीन सूचना प्रसारण राज्यमंत्री अजीत कुमार पांजा से अनुरोध किया था कि तीनों उम्मीदवारों को आकाशवाणी/ दूरदर्शन पर अपनी बात रखने की सुविधा दी जाए।

वहीं इसी चुनाव में उम्मीदवार मिथिलेश कुमार सिन्हा ने निर्वाचन आयोग से यह आग्रह किया था ।

भारत के राष्ट्रपति के पद हेतु निर्वाचन 2022 के दस्तावेज के अनुसार, ‘‘ आयोग और सरकार ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया था तथा किसी भी उम्मीदवार को अपने विचारों को प्रसारित करने की सुविधा नहीं दी गई थी। ’’

इस बारे में पूर्व चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा कि भारत में राष्ट्रपति पद के लिये चुनाव अप्रत्यक्ष मतदान के जरिये होता है जिसमें संसद सदस्य और राज्य विधानसभाओं के सदस्य हिस्सा लेते हैं ।

उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक पार्टी व्हिप से बंधे होते हैं, ऐसे में उनका मत पार्टी के रूख के आधार पर तय होता है।

जैदी ने कहा कि ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार करने की अधिक जरूरत नहीं पड़ती है।

अमेरिका में चुनाव का जिक्र करते हुए पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान के जरिये होता है जिसमें जनता मतदान में हिस्सा लेकर सीधे राष्ट्रपति को चुनती है । ऐसे में वहां उम्मीदवार चर्चा-परिचर्चा करते हैं और जनता तक अपनी बात एवं नीतिगत रूख को पहुंचाते हैं ।

भारत के राष्ट्रपति के पद हेतु निर्वाचन 2022 के दस्तावेज के अनुसार, नौंवे राष्ट्रपति के चुनाव में प्रत्याशी मिथिलेश कुमार सिन्हा के आग्रह पर यह कहा गया कि ‘आयोग के परामर्श से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा वर्ष 1977 में तैयार की गई एक योजना के तहत आकाशवाणी/ दूरदर्शन पर प्रसारण की सुविधा केवल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के आम चुनाव के दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाती है किंतु यह सुविधा अन्य चुनाव के लिए नहीं दी जाती।’

इसमें कहा गया है कि एक अन्य उम्मीदवार वी आर कृष्णा अय्यर ने तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री अजीत कुमार पांजा से अनुरोध किया था कि तीनों उम्मीदवारों को आकाशवाणी और दूरदर्शन पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। सरकार ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।

वर्ष 1987 में हुए नौंवे राष्ट्रपति चुनाव में तीन उम्मीदवार आर वेंकट रमन, वी कृष्ण अय्यर और मिथिलेश कुमार मैदान में थे। चुनाव में आर वेंकट रमन विजयी हुए थे और उन्हें 7,40,148 मत मिले थे । दूसरे स्थान पर वी कृष्णा अय्यर को 2,81,550 मत प्राप्त हुए थे जबकि मिथिलेश कुमार को 2223 मत मिले थे ।

पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एम एम अंसारी ने कहा कि आज चुनाव में अपनी बात रखने के लिये फेसबुक, ट्वीटर जैसे सोशल मीडिया मंच उपलब्ध हैं लेकिन राष्ट्रपति जैसे प्रतिष्ठित पद के लिये होने वाले चुनाव में उम्मीदवारों को सरकारी प्रसारक पर समय उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि देश के लोग उनके विचारों से रूबरू हो सकें ।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक बाध्यताओं के कारण हालांकि ऐसा नहीं हो पाता है ।

दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 1977 में हुए सातवें राष्ट्रपति चुनाव की विशेषता यह थी कि इसमें कुल मिलाकर 37 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था तथा समीक्षा के दौरान चुनाव अधिकारी ने 36 प्रत्याशियों द्वारा दाखिल किए गए नामांकनों को निरस्त कर दिया था।

इस प्रकार वैध रूप में नाम निर्देशित उम्मीदवारों में केवल नीलम संजीव रेड्डी मैदान में रह गए । ऐसे में मतदान कराए जाने के लिए न तो निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्याशियों की सूची तैयार करने की और न ही इन्हें प्रकाशित करने की जरूरत महसूस की गई ।

यह प्रथम अवसर था जब किसी उम्मीदवार को भारत के राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

भाषा दीपक दीपक पवनेश

पवनेश

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)