मिशन कर्मयोगी के अगले चरण में क्षमता विकास सुधारों को संस्थागत रूप दिया जाएगा: सीबीसी प्रमुख

मिशन कर्मयोगी के अगले चरण में क्षमता विकास सुधारों को संस्थागत रूप दिया जाएगा: सीबीसी प्रमुख

मिशन कर्मयोगी के अगले चरण में क्षमता विकास सुधारों को संस्थागत रूप दिया जाएगा: सीबीसी प्रमुख
Modified Date: May 25, 2026 / 03:31 pm IST
Published Date: May 25, 2026 3:31 pm IST

(अश्विनी श्रीवास्तव)

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) की अध्यक्ष एस राधा चौहान ने सोमवार को कहा कि मिशन कर्मयोगी के अगले चरण में राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) के तहत शुरू किए गए सुधारों को संस्थागत रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

एनपीसीएससीबी को 2020 में शुरू किया गया था। इसे मिशन कर्मयोगी के नाम से जाना जाता है।

यह सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण ढांचे में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। इसका उद्देश्य क्षमता विकास को छिटपुट प्रशिक्षण कार्यक्रमों से हटाकर एक अधिक संरचित, भूमिका-आधारित और योग्यता-संचालित प्रणाली की ओर ले जाना है, जो भारतीय मूल्यों पर आधारित हो और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हो।

चौहान ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘अगला चरण, यानी मिशन कर्मयोगी 2.0, इन्हीं आधारों पर आगे बढ़ेगा और सुधार के एजेंडे को सरकारी प्रणालियों में और गहराई तक ले जाएगा जिसमें राज्यों, अग्रणी संस्थानों और व्यक्तिगत शिक्षा को आत्मसात करने और लागू करने के लिए आवश्यक संगठनात्मक क्षमताओं पर अधिक जोर दिया जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कार्यक्रम ‘‘विकसित भारत के लिए हमारी आकांक्षाओं में एक ऊंची छलांग’’ साबित होगा।

मिशन कर्मयोगी ढांचे की संरक्षक संस्था, सीबीसी ने पिछले कुछ वर्षों में एक नये क्षमता विकास परिवेश के लिए आवश्यक मूलभूत परंपराओं, ढांचों और संस्थागत तंत्रों को स्थापित करने में मदद की है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पूर्व सचिव चौहान ने कहा कि इनमें भूमिका-आधारित और योग्यता-संबंधी शिक्षण मार्ग, शिक्षण सामग्री के लिए सामान्य गुणवत्ता मानक और डिजिटल शिक्षा के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण (आईजीओटी) कर्मयोगी का उपयोग शामिल है।

उन्होंने कहा कि अगले चरण में इन सुधारों को संस्थागत रूप देने का प्रयास किया जाएगा ताकि क्षमता विकास एक अलग प्रशिक्षण गतिविधि के बजाय सरकारी कामकाज का अभिन्न अंग बन जाए।

उन्होंने कहा कि इसका अर्थ होगा मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और अग्रिम पंक्ति की एजेंसियों में भूमिकाओं, शासन प्राथमिकताओं, प्रणालियों, प्रक्रियाओं और संस्थागत संस्कृति में सीखने को समाहित करना।

मिशन कर्मयोगी के माध्यम से हुए बदलाव का विवरण देते हुए चौहान ने कहा कि इस कार्यक्रम के द्वारा सरकारी कर्मचारियों को उपलब्ध शिक्षा की गुणवत्ता को मानकीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि भोपाल, तिरुवनंतपुरम या नगालैंड में तैनात कोई भी सरकारी कर्मचारी आईजीओटी पर उपलब्ध होने के कारण समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सामग्री प्राप्त कर सकता है और मानकीकरण सुनिश्चित किया गया है।

चौहान ने मिशन कर्मयोगी द्वारा लाए जा रहे परिवर्तनों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘इसलिए, आप देश के कोने-कोने में क्षमता विकास की गुणवत्ता को समान रूप से प्राप्त कर रहे हैं। यह एक बड़ा बदलाव और उपलब्धि है।’’

चौहान भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 1988 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।

सीबीसी प्रमुख ने कहा कि अगले चरण में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि मिशन कर्मयोगी के माध्यम से विकसित व्यक्तिगत क्षमताएं किस प्रकार संगठनात्मक प्रदर्शन में सुधार ला सकती हैं।

उन्होंने कहा कि एक प्रमुख प्राथमिकता सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों और सरकारी संस्थानों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सक्षम शासन वातावरण के लिए तैयार करना होगा।

चौहान ने कहा कि एआई से संबंधित प्रशिक्षण को ‘‘पंचायत सचिव, शहरी स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, कांस्टेबल, यातायात कांस्टेबल जैसे अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं तक भी पहुंचाया गया है, जो नागरिकों के लिए सरकार का चेहरा हैं।’’

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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