सीएक्यूएम ने जीआरएपी के नियमों में बदलाव किया, हरियाणा के सोनीपत तक प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया
सीएक्यूएम ने जीआरएपी के नियमों में बदलाव किया, हरियाणा के सोनीपत तक प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया
नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण से निपटने की चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (जीआरएपी) व्यवस्था में बदलाव किया है।
इस व्यवस्था में बदलाव के तहत जीआरएपी-के तीसरे चरण के दौरान बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल या उससे कम मानक वाले हल्के मोटर वाहनों (चार पहिया) के परिचालन पर प्रतिबंध का दायरा हरियाणा के सोनीपत तक बढ़ा दिया गया है। इससे पहले यह प्रतिबंध केवल गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में लागू था।
जीआरएपी, आपात स्थिति में किये जाने वाले उपायों का एक समूह है, जिसे वायु गुणवत्ता एक निश्चित स्तर तक पहुंचने के बाद स्थिति और खराब होने से रोकने के लिए लागू किया जाता है।
जीआरएपी का पहला चरण तब लागू होता है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 से 300 के बीच होता है।
जीआरएपी का दूसरा चरण एक्यूआई के 301 से 400 के बीच, जीआरएपी का तीसरा चरण 401 से 500 के बीच और जीआरएपी का चौथा चरण एक्यूआई के 450 से अधिक होने पर लागू किया जाता है।
इन बदलावों को सोमवार को आयोग की 30वीं बैठक में मंजूरी दी गई और मंगलवार को इसकी घोषणा की गई।
इससे पहले आयोग ने नवंबर 2025 में जीआरएपी के ढांचे में बदलाव किए थे। नवीनतम बदलावों के तहत जीआरएपी के पहले चरण के दौरान हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर जैसे पड़ोसी राज्यों के किसी भी स्थान से आने वाली अंतर-शहर या अंतरराज्यीय बसों को दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), सीएनजी और बीएस-6 डीजल से चलने वाली बसों को इससे छूट दी गई है।
पहले यह प्रावधान जीआरएपी के दूसरे चरण के तहत लागू होता था।
इसके अलावा, जीआरएपी के तीसरे और चौथे चरण के तहत आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले बीएस-4 और उससे कम मानक वाले मालवाहक वाहनों को दी जाने वाली छूट भी समाप्त कर दी गई है।
भाषा जितेंद्र माधव
माधव

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