जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जातिवार गणना की जाएगी: गृह मंत्रालय

जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जातिवार गणना की जाएगी: गृह मंत्रालय

जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जातिवार गणना की जाएगी: गृह मंत्रालय
Modified Date: January 27, 2026 / 11:04 pm IST
Published Date: January 27, 2026 11:04 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) जनगणना 2027 के तहत जातिवार गणना देश भर में फरवरी 2027 से शुरू होने वाली आबादी की गणना के दूसरे चरण के दौरान की जाएगी। हालांकि, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में यह सितंबर 2026 में होगी। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पूर्व में जारी एक सरकारी बयान का हवाला देते हुए, गृह मंत्रालय ने कहा कि जनगणना 2027 के बारे में पूरी जानकारी 12 दिसंबर 2025 को एक प्रेस नोट के माध्यम से बताई जा चुकी है।

मंत्रालय ने कहा, ‘फिर भी, कुछ लोग जनगणना 2027 और विशेष रूप से जातिवार गणना के संबंध में जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि जनगणना 2027 दो चरणों में की जाएगी, जिसमें दूसरे चरण में जातिवार गणना की जाएगी।’

इसमें कहा गया कि पिछली जनगणनाओं की तरह जनगणना 2027 भी दो चरणों में की जा रही है – पहले चरण को मकानों की गणना और आवास गणना के रूप में जाना जाता है, और दूसरा चरण आबादी की गणना है।

सरकार ने 22 जनवरी को 33 प्रश्नों की सूची जारी की, जो एक अप्रैल से शुरू होने वाले जनगणना के पहले चरण के दौरान नागरिकों से पूछे जाएंगे।

बृहस्पतिवार को प्रकाशित एक राजपत्र अधिसूचना में, भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण ने मकान के फर्श और छत में प्रयुक्त सामग्री, वहां रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या, घर का मुखिया पुरुष है या महिला, उपभोग किए जाने वाले अनाज का प्रकार, बुनियादी एवं आधुनिक आवश्यकताओं तक पहुंच और स्वामित्व वाले वाहनों के प्रकार — जैसे प्रश्न सूचीबद्ध किए हैं।

मकान सूचीकरण चरण व्यवस्थित रूप से देश भर के सभी संरचनाओं, घरों और परिवारों की सूची बनाता है ताकि आबादी की गणना के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया जा सके।

प्रश्नों की शुरुआत भवन संख्या, मकान के फर्श, दीवारों और छत में प्रयुक्त मुख्य सामग्री के बारे में पूछकर की जाएगी। इसके बाद, जनगणना अधिकारी मकान के उपयोग, उसकी स्थिति और उसमें रहने वाले व्यक्तियों की संख्या के बारे में पूछेंगे।

जनगणना अधिकारी मकान के मुखिया के बारे में भी जानकारी एकत्र करेंगे, जैसे नाम और वे महिला हैं या पुरुष, क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य समुदायों से संबंधित है और संपत्ति का स्वामी कौन है।

जनगणना 2027 का पहला चरण – घरों की सूची तैयार करने का अभियान – इस वर्ष एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश द्वारा निर्दिष्ट 30 दिनों की अवधि के दौरान होगा।

इन सवालों का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जातिवार गणना कराने की कोई मंशा नहीं है और उन्होंने उस पर ‘पीडीए’ समुदाय (‘पिछड़ा’, दलित और अल्पसंख्यक) को धोखा देने का आरोप लगाया।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि मोदी सरकार ने जिस तरह से प्रश्नावली तैयार की है उससे उसकी वास्तविक मंशा और एक व्यापक, निष्पक्ष तथा देशव्यापी जातिवार गणना के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने अभी-अभी ‘हाउस-लिस्टिंग’ और ‘हाउसिंग जनगणना शेड्यूल’ में शामिल किए जाने वाले विषयों की सूची अधिसूचित की है। प्रश्न 12 में यह पूछा गया है कि क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या ‘अन्य’ श्रेणी से संबंधित है, जबकि ओबीसी और सामान्य श्रेणी के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं पूछा गया है।’’

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जातिवार गणना को जनगणना 2027 का हिस्सा बनाया जाना है। ऐसे में जिस तरह से प्रश्न 12 को तैयार किया गया है, वह मोदी सरकार की वास्तविक मंशा और एक व्यापक, निष्पक्ष तथा देशव्यापी जातिवार गणना के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस मोदी सरकार से मांग करती है कि जातिवार गणना की प्रक्रिया के विवरण को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संस्थाओं के साथ तुरंत संवाद शुरू किया जाए।’’

भाषा नोमान सुभाष

सुभाष


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