CBFC New Rules for Indian films : 15 मार्च से बदलेगा फिल्म देखने का तरीका! अब हर फिल्म में अनिवार्य होगी यह चीज, CBFC का फैसला सुनते ही भड़के लोग

Central Board of Film Certification ने 15 मार्च 2026 से सभी भारतीय फिल्मों में subtitles और audio description अनिवार्य कर दिए हैं। इस फैसले का उद्देश्य सिनेमा को अधिक inclusive बनाना है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

CBFC New Rules for Indian films : 15 मार्च से बदलेगा फिल्म देखने का तरीका! अब हर फिल्म में अनिवार्य होगी यह चीज, CBFC का फैसला सुनते ही भड़के लोग

CBFC New Rules for Indian films / Image Source : FILE

Modified Date: March 13, 2026 / 10:10 pm IST
Published Date: March 13, 2026 10:00 pm IST
HIGHLIGHTS
  • अब सभी भारतीय फिल्मों में subtitles और audio description देना अनिवार्य होगा।
  • सेंसर बोर्ड का यह नया नियम 15 मार्च 2026 से लागू किया जाएगा।
  • फैसले का उद्देश्य विशेष रूप से सक्षम दर्शकों के लिए सिनेमा को अधिक सुलभ बनाना है।

नई दिल्ली: CBFC New Rules for Indian films केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने भारतीय सिनेमा की पहुंच को बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सेंसर बोर्ड के नए निर्देश के अनुसार, अब से सभी भारतीय फिल्मों के लिए सबटाइटल्स और ऑडियो डिस्क्रिप्शन को अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम 15 मार्च, 2026 से प्रभावी होगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि फिल्ममेकर्स को सर्टिफिकेशन के लिए फिल्म जमा करते समय इन सुविधाओं को सुनिश्चित करना होगा।

क्या है सेंसर बोर्ड का नया निर्देश?

सेंसर बोर्ड की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्म के डिजिटल सिनेमा पैकेज को E-Cinepramaan पोर्टल पर अपलोड करना होगा।  Entertainmnet News इसमें सबटाइटल्स और ऑडियो डिस्क्रिप्शन जैसे एक्सेसिबिलिटी फीचर्स का होना अनिवार्य है। बोर्ड का तर्क है कि यह पहल उन विशेष रूप से सक्षम दर्शकों के लिए सिनेमा को समावेशी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से लाई गई है, जो सुनने या देखने में अक्षम हैं।

“फिल्म का मजा हो जाएगा किरकिरा”

सेंसर बोर्ड के इस फैसले का एक वर्ग स्वागत कर रहा है, तो वहीं सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। CBFC New Rules for Indian films बड़ी संख्या में दर्शक इस अनिवार्य नियम से नाराज हैं और उनका मानना है कि इससे सिनेमाघरों में फिल्म देखने का अनुभव प्रभावित होगा।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर यूजर्स अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि स्क्रीन पर बार-बार आने वाले सबटाइटल्स फिल्म के विजुअल अनुभव को खराब करते हैं। एक यूजर ने लिखा, “सभी फिल्मों में सबटाइटल्स अनिवार्य करना समझ से परे है। अंग्रेजी फिल्मों के लिए यह ठीक है, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों में यह अनावश्यक ध्यान भटकाने वाला अनुभव होगा।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने सबटाइटल्स की तकनीकी समस्या पर गौर करते हुए कहा, “नीचे लिखे शब्द अक्सर ध्यान भटकाते हैं। कई बार एक्टर्स के शांत होने पर भी स्क्रीन पर शब्द चलते रहते हैं, जो फिल्म के प्रवाह को रोकते हैं।” एक तमिल दर्शक ने भी सहमति जताते हुए लिखा, “मैं अपनी भाषा की फिल्में देखता हूं, लेकिन सबटाइटल्स होने पर मेरी नजरें बार-बार नीचे जाने को मजबूर होती हैं, जिससे फिल्म के मुख्य दृश्यों का आनंद कम हो जाता है।

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लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and storyteller committed to ethical, ground-level, and impact-oriented reporting. A Gold Medalist in Journalism & Mass Communication, I believe in telling stories with accuracy, sensitivity, and purpose. Currently working with IBC24, I specialize in content writing, news production, and modern storytelling bridging facts with human experiences to inform, engage, and inspire audiences..