Raghav Chadha on Menstrual Hygiene : “शराब, सिगरेट तो खुलेआम, पर सैनिटरी पैड अखबार में क्यों”? संसद में राघव चड्ढा ने पीरियड को लेकर उठाएं कई बड़े सवाल
Raghav Chadha ने संसद में menstrual hygiene का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश की करोड़ों महिलाएं अब भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और गरिमा से वंचित हैं। उन्होंने सैनिटरी पैड से जुड़े सामाजिक कलंक और स्कूलों में सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई।
Raghav Chadha on Menstrual Hygiene / Image Source : X
- संसद में मेंस्ट्रुअल हाइजीन पर चर्चा।
- सैनिटरी पैड पर सामाजिक कलंक का मुद्दा उठा।
- लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर।
नई दिल्ली : Raghav Chadha on Menstrual Hygiene संसद का सत्र जारी है और देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाओं का दौर चल रहा है। इसी बीच, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक बेहद जरूरी और संवेदनशील मुद्दे को उठाकर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने संसद में (Menstrual Hygiene) के विषय को प्रमुखता से उठाते हुए देश की 35 करोड़ से अधिक महिलाओं और लड़कियों की बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा के अधिकार की वकालत की है।
सैनिटरी पैड को आज भी अखबार में लपेटा जाता है
सांसद चड्ढा ने संसद के पटल पर समाज में व्याप्त दोहरे मानदंडों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि माहवारी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसे लेकर फैला कलंक बिल्कुल भी प्राकृतिक नहीं है। Raghav Chadha on Menstrual Hygiene उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि हम ऐसे देश में रहते हैं जहाँ शराब और सिगरेट तो खुलेआम बिकती हैं, लेकिन सैनिटरी पैड को आज भी अखबार में इस तरह लपेटा जाता है मानो उसे छिपाना कोई अनिवार्यता हो। सांसद ने तर्क दिया कि यदि कोई लड़की पैड, पानी या निजता की कमी के कारण स्कूल नहीं जा पाती, तो यह उसकी व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि हम सबकी सामूहिक विफलता है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य, शिक्षा और समानता का मुद्दा बताते हुए स्पष्ट किया कि माहवारी स्वच्छता न तो कोई दान है और न ही कोई एहसान।
हम गर्व से कह सकेंगे कि हमारा समाज वास्तव में आगे बढ़ गया है
चड्ढा ने संसद में यह चिंता जताई कि भारत की 35 करोड़ से अधिक महिलाएं और लड़कियां आज भी इस बुनियादी विषय पर डर, शर्म और चुप्पी का सामना कर रही हैं। Raghav Chadha on Menstrual Hygiene उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि कोई भी राष्ट्र तब तक वास्तव में प्रगतिशील नहीं कहला सकता, जब तक उसकी बेटियां गरिमा के साथ जीवन न जी सकें और बिना किसी कलंक के अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर खुलकर बात न कर सकें। चड्ढा के अनुसार, जिस दिन भारत की हर लड़की बिना झिझक स्कूल जा सकेगी, उसी दिन हम गर्व से कह सकेंगे कि हमारा समाज वास्तव में आगे बढ़ गया है।
Periods are natural. Stigma is not.
If a girl misses school because there are no sanitary pads, no water and no privacy, it is not her personal problem. It is our collective failure.
We live in a country where alcohol and cigarettes are sold openly, but sanitary pads are still… pic.twitter.com/C0KJt4du8J
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 13, 2026
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