लापता और बचाए गए बच्चों के लिए डीएनए, बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली संबंधी याचिका पर केन्द्र से जवाब तलब
लापता और बचाए गए बच्चों के लिए डीएनए, बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली संबंधी याचिका पर केन्द्र से जवाब तलब
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर केंद्र और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से जवाब मांगा, जिसमें लापता और बचाए गए बच्चों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान, तलाश और उनके परिवारों से पुनर्मिलन के लिए राष्ट्रीय डीएनए एवं बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली स्थापित करने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता रीपक कंसल की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और एनसीपीसीआर को नोटिस जारी किए।
याचिकाकर्ता प्रवीर चौधरी के माध्यम से दायर याचिका में केंद्र के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लापता और बचाए गए बच्चों की डीएनए तथा बायोमीट्रिक पहचान के लिए एक केंद्रीकृत प्रणाली बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘भारत संघ और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को लापता और बचाए गए बच्चों के लिए राष्ट्रीय डीएनए एवं बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया जाए, ताकि वैज्ञानिक मिलान के जरिए उनकी पहचान बहाल की जा सके।’’
याचिका में कहा गया है, ‘‘पुलिस रिकॉर्ड, आश्रय गृहों, बाल कल्याण समितियों और मानव तस्करी रोधी इकाइयों समेत बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी मौजूदा आंकड़ों को एक केंद्रीकृत और वास्तविक समय वाली राष्ट्रीय प्रणाली से जोड़ा जाए तथा उनके बीच आपसी समन्वय सुनिश्चित किया जाए।’’
याचिका में लापता और तस्करी के शिकार बच्चों के मामलों में राज्यों के बीच अनिवार्य समन्वय, समयबद्ध जांच, बचाव और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर बाल संरक्षण एवं मानव तस्करी रोधी कार्यबल गठित करने का भी अनुरोध किया गया है।
भाषा शोभना मनीषा
मनीषा

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