केरल में नये अदालत परिसरों की स्थापना ‘‘न्याय की बढ़ती जरूरतों’’ को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण निवेश: सीजेआई
केरल में नये अदालत परिसरों की स्थापना ‘‘न्याय की बढ़ती जरूरतों’’ को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण निवेश: सीजेआई
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि केरल में दो नये अदालत परिसरों की स्थापना ‘‘न्याय की बढ़ती जरूरतों’’ को पूरा करने और अदालतों को लोगों के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।
केरल सरकार की ओर से 100 करोड़ रुपये की लागत से इरिंजालकुडा और चावक्कड़ में बनाए गए दोनों अदालत परिसरों का मंगलवार शाम सीजेआई ने डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया।
प्रधान न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘मुझे बताया गया है कि जिले में लगभग 30,000 दीवानी मामले और एक लाख से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि जैसे-जैसे हमारा समाज विकसित और अधिक जटिल होता जा रहा है, अदालतों पर दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में नए अदालत परिसर न्याय की इन बढ़ती जरूरतों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश हैं।’’
उन्होंने कहा कि नए परिसरों के जरिये अदालतों को केवल दूरी के लिहाज से ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और बेहतर पहुंच के माध्यम से भी लोगों के करीब लाया जा रहा है, ताकि न्याय वास्तव में उनकी पहुंच में हो।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि इन परिसरों का महत्व केवल न्यायिक ढांचे में नयी इमारतें जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था को बड़े शहरों और महानगरों के बजाय छोटे कस्बों में रहने वाले लोगों के करीब लाने का प्रयास है।
प्रधान न्यायाधीश ने परिवार अदालतों में अलग-अलग कक्षों वाले परामर्श कक्षों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि निजी और सम्मानजनक माहौल में परामर्श की सुविधा उन लोगों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है, जो अपने जीवन के बेहद कठिन दौर में मदद के लिए अदालत आते हैं।
उन्होंने कहा कि महिला वकीलों के लिए अलग कक्ष उपलब्ध कराया जाना भी स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में महिला अधिवक्ताओं की संख्या बढ़ रही है और वे न्याय प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक न्यायिक संस्थानों में केवल न्यायिक फैसलों के लिए ही नहीं बल्कि संवाद, सुलह और गरिमा के लिए भी जगह होनी चाहिए।
भाषा राखी देवेंद्र
देवेंद्र

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