केंद्र यह सुनिश्चित करे कि हर पैदल यात्री के लिए अतिक्रमण-मुक्त जगह उपलब्ध हो: न्यायालय

Ads

केंद्र यह सुनिश्चित करे कि हर पैदल यात्री के लिए अतिक्रमण-मुक्त जगह उपलब्ध हो: न्यायालय

  •  
  • Publish Date - August 3, 2026 / 12:12 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 12:12 PM IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि जहां भी सड़क हो, वहां पैदल यात्रियों के लिए उचित रूप से चिह्नित और अतिक्रमण-मुक्त स्थान सुनिश्चित किया जाए।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज से कहा कि वह संबंधित अधिकारियों को निर्देश दें कि पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित स्थान पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं हो और उसे मोटर वाहनों के मार्ग से स्पष्ट रूप से अलग रखा जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘बिना किसी बड़े निवेश या निर्माण कार्य के भी यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पैदल यात्रियों के लिए स्थान का स्पष्ट सीमांकन हो। जहां भी सड़क है, वहां पैदल यात्रियों के लिए अलग जगह होनी चाहिए। इसे रस्सी या किसी अन्य साधन से चिह्नित किया जाए और यह सुनिश्चित हो कि वहां कोई अतिक्रमण नहीं हो।’’

पीठ ने उन्हें अधिकारियों को निर्देश देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और इस बात पर जोर दिया कि पैदल यात्रियों को यह भरोसा होना चाहिए कि यह स्थान उनके लिए ही है और वे बिना किसी चलते वाहन के खतरे के स्वतंत्र रूप से चल सकते हैं।

शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तारीख तय की है।

शीर्ष अदालत ने 19 जून को एक अहम फैसले में कहा था कि सीमांकित फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।

अदालत ने कहा था कि सीमांकित मार्गों पर मोटर वाहनों के स्थान पर पैदल यात्रियों के अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी और यह अनुच्छेद 19 (1) (घ) के तहत गारंटीकृत आवागमन के अधिकार एवं अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) सहित अन्य मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

भाषा सुरभि रंजन

रंजन

ताजा खबर