जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए स्पष्ट समय सीमा बताये केंद्र : कांग्रेस नेता कर्रा

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए स्पष्ट समय सीमा बताये केंद्र : कांग्रेस नेता कर्रा

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए स्पष्ट समय सीमा बताये केंद्र : कांग्रेस नेता कर्रा
Modified Date: February 5, 2026 / 04:30 pm IST
Published Date: February 5, 2026 4:30 pm IST

जम्मू, पांच फरवरी (भाषा) कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने केंद्र शासित प्रदेश का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए बृहस्पतिवार को केंद्र से एक स्पष्ट समयसीमा बताने की मांग की।

विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर चर्चा में भाग लेते हुए, कर्रा ने कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी और पुनर्वास को आसान बनाने के लिए एक सर्वदलीय विधायक समिति के गठन का भी सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद बहाल हुई, अन्यथा यह विधानसभा गठित ही नहीं होती।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘उपराज्यपाल ने सहभागितापूर्ण शासन और जनविश्वास की बात की, लेकिन मैं यह पूछना चाहता हूं कि ऐसा विश्वास कैसे कायम रह सकता है जब राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी जनता की मूल मांग पूरी न हो।’’

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का दर्जा देने का जिक्र उनके पिछले अभिभाषण में किया गया था, लेकिन इस बार इसे छोड़ दिया गया है।

कर्रा ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व, जैसे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जम्मू-कश्मीर को तत्काल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज हम इस सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से एक बुनियादी सवाल पूछते हैं। वे बार-बार कहते हैं कि राज्य का दर्जा उचित समय पर दिया जाएगा। हमें बताया जाना चाहिए कि वह उचित समय क्या है? और जम्मू कश्मीर के लोगों को कब तक इंतजार करना पड़ेगा?’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि उपराज्यपाल अपने अभिभाषण में दो महत्वपूर्ण मानवीय मुद्दों का उल्लेख करना भूल गए, प्रवासी कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास तथा 1947, 1965 और 1971 के शरणार्थियों के मुद्दे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस सदन के माध्यम से एक बार फिर यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास केवल प्रतीकात्मक या आर्थिक उपायों से संभव नहीं है, बल्कि एक व्यापक, स्थायी और गरिमापूर्ण योजना की आवश्यकता है।’’

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश


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