केंद्र ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम को खत्म करे, मनरेगा बहाल करे: सिद्धरमैया

केंद्र ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम को खत्म करे, मनरेगा बहाल करे: सिद्धरमैया

केंद्र ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम को खत्म करे, मनरेगा बहाल करे: सिद्धरमैया
Modified Date: January 3, 2026 / 03:24 pm IST
Published Date: January 3, 2026 3:24 pm IST

बेंगलुरु, तीन जनवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार केंद्र से विकसित भारत-रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम को खत्म करने और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के कार्यकाल के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बहाल करने की मांग करती है, जिसने ‘‘गरीबों, कमजोरों, महिलाओं और छोटे किसानों को रोजगार का अधिकार दिया’’।

उन्होंने आरोप लगाया कि नया कानून आजीविका का अधिकार छीनता है, पंचायतों की शक्तियों को कमजोर करता है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है।

सिद्धरमैया ने यहां संवाददाताओं से कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने मनरेगा को खत्म कर ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम पारित किया है। मनरेगा के तहत गरीब और कमजोर वर्गों, महिलाओं और छोटे किसानों को अपने गांव में काम मांगने का अधिकार था। अब नए अधिनियम में यह सरकार तय करेगी कि किस ग्राम पंचायत में काम कराया जाएगा।”

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राज्य सरकार इस मुद्दे को एक साथ उठाएंगी और ‘‘इस संबंध में तुरंत एक कार्य योजना बनाई जाएगी।’’

उन्होंने कहा, “कांग्रेस जनता, मजदूरों और समान विचारधारा वाले सभी लोगों के साथ मिलकर तब तक संघर्ष करेगी, जब तक ‘वीबी-जी राम जी’ वापस नहीं लिया जाता। जैसा कि कृषि कानूनों के मामले में हुआ था।”

नए कानून के प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए सिद्धरमैया ने कहा, “मोदी सरकार ने इस अधिनियम के जरिए तीन काम किए हैं। इसने समाज के कमजोर वर्ग खासतौर पर महिलाओं, गरीबों और छोटे किसानों का आजीविका का अधिकार छीना है, पंचायतों की शक्तियां कम की हैं और बिना किसी परामर्श के राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला है। सरकार ने न तो राज्यों से और न ही जनता से परामर्श किया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से ‘वीबी-जी राम जी’ को खत्म करने और मनरेगा को बहाल करने का आग्रह करती है।

उन्होंने कहा, “हम लोगों के रोजगार के अधिकार को बहाल करने और पंचायतों के स्वशासन के अधिकारों को भी पुनः स्थापित करने की मांग करते हैं।”

भाषा खारी दिलीप

दिलीप


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