केंद्र सरकार ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक की समीक्षा करे: जमात-ए इस्लामी हिंद
केंद्र सरकार ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक की समीक्षा करे: जमात-ए इस्लामी हिंद
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी हिंद ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान को आपराधिक कृत्य बनाने के प्रावधान वाले ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026’ की समीक्षा की मांग करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि देशभक्ति को किसी खास गाने, नारे या प्रतीकात्मक काम में हिस्सा लेने से नहीं मापा जा सकता।
जमात के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक बयान में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राजग सरकार से राष्ट्रगीत को लेकर सुरक्षा उपाय लागू करने की अपील की ताकि संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों और आज़ादी से समझौता किए बिना राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान बना रहे।
संसद ने पिछले हफ्ते ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर दिया। इसके तहत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को भी अनिवार्य बनाया गया है। इसके प्रावधानों के तहत वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान या उसका अपमान आपराधिक कृत्य माना जाएगा और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है।
जमात के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा, “जमात देश की संवैधानिक संस्थाओं का पूरा सम्मान करती है, लेकिन यह साफ तौर पर कहना चाहती है कि ‘वंदे मातरम’ के कुछ हिस्से-खासकर वे जिनमें मातृभूमि को एक देवी के रूप में याद किया गया है और उसे कुछ देवियों से जोड़ा गया है, इस्लाम की एकेश्वरवादी मान्यताओं के अनुकूल नहीं हैं।”
उन्होंने कहा कि यह चिंता न तो नई है और न ही सांप्रदायिक है और इसे भारत के लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक ढांचे के भीतर स्वीकार किया गया है।
खान ने कहा कि राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 साफ तौर पर ‘वंदे मातरम’ गाने के लिए मजबूर नहीं करता, लेकिन इस गीत के प्रति ‘अपमान’ या ‘अनादर’ माने जाने वाले कृत्यों को अपराध माना गया है।
उन्होंने कहा कि इससे धार्मिक अल्पसंख्यकों में चिंता बढ़ सकती है और ऐसे मुद्दे पर बेवजह तनाव पैदा हो सकता है जो सीधे तौर पर अंतरात्मा और आस्था की आज़ादी से जुड़ा है।
खान ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक धार्मिक आस्था के आधार पर सम्मानपूर्वक किसी गतिविधि में शामिल न होना भी संविधान के तहत संरक्षित अधिकार है।
जमात उपाध्यक्ष ने कहा, “देशभक्ति को किसी खास गाने, नारे या प्रतीकात्मक काम में हिस्सा लेने से नहीं मापा जा सकता। इसलिए जमात सरकार से अपील करती है कि वह इस कानून की समीक्षा करे और साफ तौर पर सुरक्षा उपाय लागू करे, ताकि संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों और आज़ादी से समझौता किए बिना राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान बना रहे।”
भाषा नोमान
नोमान नेत्रपाल
नेत्रपाल

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