केंद्र-राज्य बताएं कि मानव तस्करी के मामलों में क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए: न्यायालय

केंद्र-राज्य बताएं कि मानव तस्करी के मामलों में क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए: न्यायालय

केंद्र-राज्य बताएं कि मानव तस्करी के मामलों में क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए: न्यायालय
Modified Date: March 29, 2026 / 12:20 am IST
Published Date: March 29, 2026 12:20 am IST

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और सभी राज्यों को मानव तस्करी के मामलों में अपनाई जाने वाली मानक प्रक्रिया के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि वह किसी काल्पनिक या सैद्धांतिक सूत्र में रुचि नहीं रखती, बल्कि एक व्यावहारिक दृष्टिकोण चाहती है।

पीठ ने केंद्रीय गृह सचिव, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को सभी हितधारकों के साथ चर्चा करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, “भारत सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस संबंध में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें कि उनके अनुसार ऐसे मामलों में कौन सी मानक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हम यह स्पष्ट करते हैं कि न्यायालय किसी काल्पनिक या सैद्धांतिक सूत्र में रुचि नहीं रखता, बल्कि एक व्यावहारिक रणनीति/दृष्टिकोण चाहता है जिसे घटना घटित होने वाले स्थानीय पुलिस थाना स्तर पर तुरंत लागू किया जा सके।’’

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मानव तस्करी, जिसमें बाल तस्करी भी शामिल है, के मामलों में समय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उच्चतम न्यायालय मानव तस्करी के संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

न्यायालय ने कुछ राज्यों द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद उपस्थित न होने पर आपत्ति जताई और सभी पुलिस महानिदेशकों से स्पष्टीकरण मांगा।

न्यायालय ने कहा, ‘‘ऐसे राज्यों के सभी पुलिस महानिदेशकों से, जो नोटिस जारी होने और विधिवत तामील होने के बावजूद उपस्थित नहीं हुए, 16 अप्रैल, 2026 तक व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा जाए, ताकि वे उन परिस्थितियों का स्पष्टीकरण दे सकें जिनके तहत उन्होंने नोटिस जारी होने और विधिवत तामील होने के बावजूद उपस्थित न होने का विकल्प चुना है। ऐसा न करने पर उन्हें स्वयं इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा।’’

न्यायालय ने कहा कि यदि वे 16 अप्रैल, 2026 तक ऐसा कोई शपथ पत्र दाखिल नहीं करते हैं, तो उनकी अनुपस्थिति का कोई बहाना स्वीकार्य नहीं होगा।

भाषा संतोष गोला

गोला


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