केंद्र प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन वापस ले : केरल विधानसभा

केंद्र प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन वापस ले : केरल विधानसभा

केंद्र प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन वापस ले : केरल विधानसभा
Modified Date: July 1, 2026 / 04:52 pm IST
Published Date: July 1, 2026 4:52 pm IST

तिरुवनंतपुरम, एक जुलाई (भाषा) केरल विधानसभा ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की अपील की। प्रस्ताव में दलील दी कि इन बदलावों से स्वयंसेवी और परमार्थ संगठनों के कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ के प्रावधानों का स्वयंसेवी संगठनों विशेष रूप से केरल में सामाजिक, स्वास्थ्य, शिक्षा और परमार्थ के क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

प्रस्ताव में उन्होंने कहा कि राज्य में पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाएं दशकों से सरकार के प्रयासों में मदद कर रही हैं। ये संस्थाएं समाज के पिछड़े वर्गों, जरूरतमंदों को कल्याणकारी सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा सहायता देने के साथ-साथ दिव्यांगों के पुनर्वास और आपदा राहत का काम भी कर रही हैं।

प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि इन संशोधनों को पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले उपायों के तौर पर पेश किया गया है, लेकिन वास्तव में ये नागरिक समाज संगठनों की स्वायत्तता को कमजोर करेंगे और उनके लोकतांत्रिक कामकाज को सीमित करेंगे।

विधानसभा ने इस बात पर चिंता जताई कि संगठनों को अब व्यापक जनहित के कामों के लिए विदेशी चंदा लेने की इजाज़त नहीं होगी, बल्कि उनकी गतिविधियां पांच श्रेणियों सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और धार्मिक कार्यो के तहत परिभाषित 105 विशेष क्षेत्रों तक ही सीमित रहेंगी।

प्रस्ताव में उस प्रावधान पर आपत्ति जताई जिसके तहत एक राज्य में पंजीकृत संगठनों को दूसरे राज्य में काम करने के लिए नये सिरे से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसमें कहा गया कि इससे स्वयंसेवी कार्यों में व्यावहारिक मुश्किलें आएंगी।

प्रस्ताव में कहा गया है कि विदेशी अशंदान की अगली किस्त को तभी जारी किए जाने की शर्त, जब पूर्व की किस्तों का इस्तेमाल सत्यापित हो जाए, से परियोजाओं को समय पर लागू करने में देरी कर सकती है।

विधानसभा ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन संविधान के अनुच्छेद 19, 20 और 25 का उल्लंघन करते हैं, संघीय ढांचे के खिलाफ हैं और देश भर में स्वयंसेवी संगठनों के कामकाज को गंभीर रूप से कमजोर करेंगे। इसलिए, विधानसभा केंद्र से ‘विदेशी अशंदान संशोधन विधेयक, 2026’ और ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन नियमावली 2026’ दोनों को तत्काल वापस लेने की अपील करता है।

प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)विधायक वी. मुरलीधरन ने इसमें तीन संशोधन पेश किए। मुख्यमंत्री सतीशन ने हालांकि भाजपा सदस्य द्वारा पेश संशोधनों का विरोध करते हुए कहा कि ये प्रस्ताव के मूल उद्देश्य के खिलाफ हैं।

भाषा धीरज माधव

माधव


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