सदियों पुरानी मामंगम परंपरा 250 साल बाद फिर से हुई जीवंत : प्रधानमंत्री मोदी
सदियों पुरानी मामंगम परंपरा 250 साल बाद फिर से हुई जीवंत : प्रधानमंत्री मोदी
(फाइल फोटो सहित)
नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सदियों पुरानी मामंगम परंपरा का रविवार को उल्लेख करते हुए कहा कि यह लगभग 250 वर्षों के अंतराल के बाद फिर से जीवंत हुई है। मामंगम परंपरा को केरल कुंभ के नाम से भी जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण तक नदियां भले अलग-अलग हों, लेकिन आस्था की धारा एक ही है।
रेडियो पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ की अद्भुत तस्वीरें लोगों को अभी भी जरूर याद होंगी। उन्होंने कहा कि संगम के तट पर उमड़ता जनसागर, आस्था का अथाह प्रवाह और स्नान के उस पावन क्षण में, जैसे भारत अपनी सनातन चेतना से साक्षात्कार कर रहा था।
उन्होंने कहा, ‘‘महाकुंभ की वही धारा, वही माघ का महीना, वही श्रद्धा का स्वर, जब उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ता है, तो एक नयी पहचान ले लेता है। केरल की धरती पर, भारतप्पुझा नदी के किनारे तिरुनावाया में सदियों पुरानी एक परंपरा रही है – मामंगम।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे कई लोग महा माघ उत्सव या केरल कुंभ भी कहते हैं। उन्होंने कहा कि माघ के महीने में पवित्र नदी में स्नान और उस क्षण को जीवन का अमिट स्मरण बना लेना, यही इसकी आत्मा है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ यह परंपरा जैसे ओझल हो गई थी। मोदी ने कहा कि करीब ढाई-सौ वर्षों तक यह आयोजन उसी भव्यता में नहीं हुआ था जैसे पहले हुआ करता था।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन आज अपनी विरासत को फिर से पहचान रहे हमारे देश में इतिहास ने फिर करवट ली है। इस बार बिना किसी बड़ी घोषणा के केरल कुंभ का सफल आयोजन हुआ। लोगों ने इसके बारे में एक-दूसरे को बताया, कानों-कान बात पहुंचती गई और देखते ही देखते श्रद्धालु तिरुनावाया पहुंचने लगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महाकुंभ हो या केरल कुंभ, यह केवल स्नान का पर्व नहीं है। यह स्मृति का जागरण है। यह संस्कृति का पुनर्स्मरण है। उत्तर से दक्षिण तक, नदियां भले अलग हों, किनारे भले अलग हों, पर आस्था की धारा एक ही है- यही भारत है।’’
भाषा आशीष नेत्रपाल
नेत्रपाल

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