चंपत और मिश्रा का इस्तीफा ‘वित्तीय गबन’ की स्वीकारोक्ति, न्यायालय की निगरानी में हो जांच: कांग्रेस
चंपत और मिश्रा का इस्तीफा 'वित्तीय गबन' की स्वीकारोक्ति, न्यायालय की निगरानी में हो जांच: कांग्रेस
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय तथा अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने को वित्तीय अनियमितताओं की स्वीकारोक्ति करार दिया और आरोप लगाया कि केवल कुछ लोगों के हटने से मामला खत्म नहीं हो जाता और पूरे ट्रस्ट को भंग कर इस प्रकरण की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए।
पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि ट्रस्ट द्वारा यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि पिछले कुछ समय से सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं की खबरें सही थीं।
उन्होंने कहा कि भगवान राम के मंदिर को वर्षों से लूटने वाले लोगों को हटाया जाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
खेड़ा ने कहा कि यह घोषणा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की ओर से की गई, जबकि वित्तीय मामलों की निगरानी, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ट्रस्ट की संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी।
उनका कहना है कि ट्रस्ट का कोई भी सदस्य अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता, क्योंकि उनके कार्यकाल में ही यह पूरा मामला चलता रहा।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि देश को केवल कुछ लोगों के इस्तीफों की नहीं, बल्कि पूरे ट्रस्ट को भंग कर उसके पुनर्गठन की आवश्यकता है और ट्रस्ट के सभी सदस्यों की स्वतंत्र तथा उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच होनी चाहिए।
खेड़ा ने यह भी कहा कि जवाबदेही केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके अनुसार, इसकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने ट्रस्ट का गठन किया और कई सदस्यों की नियुक्ति की।
खेड़ा ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार पर भी आरोप लगाया कि उसने कथित अनियमितताओं पर प्रभावी निगरानी नहीं रखी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन की जांच जारी रहने के बीच सोमवार को अयोध्या में ट्रस्ट की हुई एक बैठक के दौरान महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिये गए। ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्य कृष्ण मोहन को महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का भी निर्णय लिया गया।
भाषा हक माधव धीरज
धीरज

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